Chinese Kali maa temple: भारत का इकलौता काली मंदिर जहां चीनी समुदाय करता है पूजा, भोग में चढ़ता है चाऊमीन-मोमोज

Chinese Kali maa temple: जब बात आस्था की आती है, तो भारत की विविधता पूरी दुनिया को चौंका देती है. कोलकाता में स्थित एक काली माता का मंदिर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी चीनी समुदाय निभाता है और मां काली को भोग में चाऊमीन व मोमोज अर्पित किए जाते हैं.

यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत और चीन की साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है. यहां भारतीय परंपराओं के साथ-साथ चीनी संस्कृति की झलक साफ नजर आती है, जो इसे देश के सबसे अनोखे मंदिरों में शामिल करती है.

चीनी समाज की आस्था से जुड़ा है मंदिर का इतिहास (Chinese Kali maa temple)

कहा जाता है कि वर्षों पहले जब चीनी समुदाय के लोग व्यापार के सिलसिले में कोलकाता आए, तो उन्होंने यहीं अपनी बसाहट बनाई. समय के साथ-साथ उन्होंने स्थानीय परंपराओं को अपनाया और मां काली को शक्ति और सुरक्षा की देवी के रूप में स्वीकार किया.

धीरे-धीरे यह मंदिर चीनी समुदाय की आस्था का केंद्र बन गया. आज भी मंदिर की देखरेख, पूजा-पाठ और व्यवस्थाएं मुख्य रूप से चीनी मूल के भारतीय नागरिक ही संभालते हैं.

चीनी भाषा में होती है प्रार्थना

इस काली मंदिर में प्रवेश करते ही वातावरण बिल्कुल अलग महसूस होता है. यहां प्रार्थनाएं चीनी भाषा में की जाती हैं, अगरबत्तियों की खुशबू भी सामान्य मंदिरों से अलग होती है और पूजा की विधि में चीनी रीति-रिवाजों की झलक दिखाई देती है.

हालांकि, मंदिर में स्थापित मां काली की प्रतिमा पूरी तरह पारंपरिक भारतीय स्वरूप में है, जो इस सांस्कृतिक संगम को और भी खास बना देती है.

भोग में चाऊमीन और मोमोज

इस मंदिर की सबसे अनोखी और चर्चित परंपरा है भोग. यहां मां काली को नारियल और फलों के साथ-साथ चाऊमीन और मोमोज भी अर्पित किए जाते हैं. पूजा के बाद यही भोग भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रसाद को श्रद्धा के साथ ग्रहण किया जाता है और यह परंपरा वर्षों से बिना किसी विवाद के चली आ रही है.

देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

इस अनोखे काली मंदिर को देखने के लिए न केवल कोलकाता, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचते हैं. विदेशी पर्यटक भी यहां आकर भारत की सांस्कृतिक विविधता को करीब से देखते हैं.

काली पूजा और विशेष अवसरों पर मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है, जो यह साबित करती है कि आस्था की कोई सीमा और भाषा नहीं होती.

सांस्कृतिक एकता की मिसाल

कोलकाता का यह काली मंदिर आज के दौर में सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का मजबूत संदेश देता है. यह दिखाता है कि जब संस्कृतियां मिलती हैं, तो टकराव नहीं, बल्कि नई और सुंदर परंपराएं जन्म लेती हैं.

यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को दर्शाने वाला एक खास प्रतीक बन चुका है.

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