Success Story: 48 बार नाकामी, फिर भी नहीं टूटा हौसला, अब जेल प्रहरी बनकर रचेंगे नई मिसाल, मोटिवेशनल है संदीप की कहानी

Success Story: सफलता अक्सर उन लोगों के कदम चूमती है जो गिरकर भी उठना नहीं छोड़ते। राजस्थान के रहने वाले संदीप कुमार की कहानी इसी जज़्बे की मिसाल बन चुकी है। जहां कई लोग एक-दो असफलताओं के बाद अपने सपनों को अलविदा कह देते हैं, वहीं संदीप ने 48 बार असफल होने के बावजूद उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। वर्षों की मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास ने आखिरकार उन्हें वह मुकाम दिलाया, जिसका सपना उन्होंने लंबे समय से देखा था — अब वे जेल प्रहरी के पद पर चयनित हो चुके हैं।

2019 से शुरू हुआ संघर्ष का सफर (Success Story)

संदीप ने वर्ष 2019 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी। उनका लक्ष्य साफ था — सरकारी नौकरी हासिल करना। सीमित संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने अपने इरादों को कमजोर नहीं होने दिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में भाग लेना शुरू किया, जिससे अनुभव तो बढ़ा, लेकिन सफलता लगातार दूर ही रही।

48 परीक्षाएं दीं, हर बार सीखा नया सबक

संदीप ने राजस्थान पुलिस, पटवारी, वन रक्षक और अन्य कई सरकारी परीक्षाओं में भाग लिया। कई बार अच्छे अंक भी प्राप्त हुए, लेकिन अंतिम मेरिट सूची में नाम नहीं आ पाया। कभी कुछ अंकों से चूक गए तो कभी शारीरिक परीक्षा में पीछे रह गए। बावजूद इसके उन्होंने हर असफलता को सीख में बदला और अपनी तैयारी को और बेहतर किया।

आखिरकार मेहनत लाई रंग

लगातार प्रयासों के बाद वह दिन भी आया जब जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। संदीप ने न केवल परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि मेरिट सूची में 194वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया। यह सफलता केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या का फल थी जिसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी।

परिवार का साथ बना ताकत

संघर्ष के कठिन दौर में संदीप के परिवार ने उन्हें हर कदम पर समर्थन दिया। जब मन डगमगाया, तब परिवार ने हिम्मत बढ़ाई। यही सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। आज उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं।

अधिकारियों ने भी सराहा जज़्बा

उनकी सफलता की चर्चा तब और बढ़ी जब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष ने भी सार्वजनिक रूप से उनकी लगन और धैर्य की प्रशंसा की। इस सराहना ने संदीप को और भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की तैयारी का एक चरण होती है।

संदीप कुमार का सफर यह साबित करता है कि सपने वही सच होते हैं, जिनके लिए इंसान बार-बार गिरकर भी उठने का साहस रखता है। धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास — यही तीन मंत्र किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता खोल सकते हैं।

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