Holashtak 2026:रंगों के पर्व होली से पहले आने वाला होलाष्टक का समय धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होगी और यह अवधि होलिका दहन तक चलेगी। मान्यता है कि इन आठ दिनों में शुभ मांगलिक कार्यों को टाल दिया जाता है, लेकिन पूजा-पाठ, जप और आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय अत्यंत फलदायी होता है।
होलाष्टक को लेकर ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र मानी जाती है, जिससे मानसिक अशांति, तनाव और पारिवारिक कलह बढ़ सकता है। ऐसे में नियमित मंत्र जाप व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल प्रदान करता है।
क्यों खास है होलाष्टक?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक के दिनों में भक्त प्रह्लाद पर अत्याचार किए गए थे। इसी कारण इन दिनों को साधना और ईश्वर भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय आत्मशुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने का अवसर देता है।
होलाष्टक में करें इन 7 मंत्रों का जप
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – यह मंत्र मानसिक शांति और भय से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
ॐ नमः शिवाय – तनाव कम करने और आत्मबल बढ़ाने के लिए प्रभावी।
महामृत्युंजय मंत्र – स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत और दीर्घायु की कामना के लिए।
गायत्री मंत्र – सकारात्मक सोच और बुद्धि के विकास के लिए।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः – आर्थिक स्थिरता और समृद्धि के लिए।
हनुमान मंत्र (ॐ हनुमते नमः) – साहस और बाधाओं से रक्षा के लिए।
नारायण कवच का पाठ – नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा के लिए विशेष माना जाता है।
कैसे करें मंत्र जाप?
होलाष्टक के दौरान सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाकर कम से कम 108 बार चुने हुए मंत्र का जप करें। यदि संभव हो तो तुलसी या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें। नियमितता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या मिल सकते हैं लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक में मंत्र जप से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे परिवार में सामंजस्य बढ़ता है, मानसिक तनाव कम होता है और सेहत में सुधार देखने को मिलता है। कई लोग इस अवधि में उपवास, दान और सत्संग भी करते हैं, जिससे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
हालांकि, इन मान्यताओं का आधार आस्था और परंपरा पर टिका है। लेकिन यह भी सच है कि नियमित ध्यान और मंत्र जाप मन को स्थिर करता है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन में संतुलन और सुकून महसूस करता है।
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