CBSE New Rule: देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए अहम खबर है। Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) ने 2026 से लागू होने वाली नई त्रिभाषा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा पढ़ना अनिवार्य होगा। इस फैसले को स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत छात्र अपनी पहली और दूसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषाओं का चयन करेंगे। इनमें हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, गुजराती, बंगाली समेत अन्य मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाएं शामिल हो सकती हैं। तीसरी भाषा के रूप में किसी एक विदेशी भाषा का चुनाव करना जरूरी होगा। विदेशी भाषाओं की सूची में फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, जापानी जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाएं शामिल किए जाने की संभावना है।
बोर्ड का मानना है कि इस कदम से छात्रों की भाषाई समझ मजबूत होगी और वे बहुभाषी कौशल के साथ आगे बढ़ सकेंगे। साथ ही, विदेशी भाषा का ज्ञान उच्च शिक्षा और वैश्विक करियर अवसरों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
बदलते दौर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग की जरूरत को देखते हुए यह निर्णय अहम माना जा रहा है।
सीबीएसई इस नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा, ताकि स्कूलों को जरूरी संसाधन जुटाने और शिक्षकों की नियुक्ति व प्रशिक्षण की तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके। बोर्ड की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे, जिससे स्कूलों में पढ़ाई का ढांचा व्यवस्थित तरीके से तैयार हो सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बहुभाषिक शिक्षा से छात्रों की संज्ञानात्मक क्षमता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक समझ में सुधार होता है। वहीं कई अभिभावक इसे सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि इससे बच्चों को भारतीय भाषाई विरासत से जुड़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अवसरों की दिशा में भी बढ़ने का मौका मिलेगा।
कुल मिलाकर, 2026 से लागू होने जा रही यह नई भाषा व्यवस्था स्कूल शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकती है, जिसका असर आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

