Kharmas March 2026: मार्च का महीना धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी समय खरमास की शुरुआत होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब लगभग 30 दिनों की अवधि को खरमास कहा जाता है। वर्ष 2026 में खरमास की शुरुआत 14 मार्च 2026 से मानी जा रही है और यह 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इस दौरान कई मांगलिक कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।
क्या होता है खरमास? (Kharmas March 2026)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में होते हैं तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है। इस समय देवताओं के गुरु बृहस्पति का प्रभाव अधिक माना जाता है। इसी कारण इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को टालने की परंपरा है। हालांकि यह समय पूरी तरह अशुभ नहीं माना जाता, बल्कि इसे पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
खरमास में क्या करें?
खरमास के दौरान व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। मान्यता है कि इस समय किया गया दान और पूजा विशेष फल देता है।
- रोज सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप करें।
- गीता, रामायण या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
- गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, कपड़े या धन का दान करें।
- मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
खरमास में क्या न करें?
खरमास के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय नहीं माना जाता।
- विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य न करें।
- नई संपत्ति या जमीन खरीदने से बचें।
- नए व्यापार या बड़े निवेश की शुरुआत न करें।
- मुंडन, जनेऊ जैसे बड़े संस्कारों को टालना बेहतर माना जाता है।
खरमास का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास का समय लोगों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करता है। इस अवधि में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए इस समय को पूजा, ध्यान और दान-पुण्य के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
अगर आप मार्च में कोई शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो बेहतर होगा कि उसे खरमास शुरू होने से पहले पूरा कर लें या फिर इसके समाप्त होने के बाद की तारीख तय करें।
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