Harish Rana News: एक मां-बाप के लिए इससे बड़ा दुख शायद ही कोई हो सकता है कि जिस बेटे के लिए उन्होंने सालों तक हर खुशी कुर्बान कर दी, उसी को अपनी आंखों के सामने खोना पड़े। हरीश राणा की कहानी आज हर किसी की आंखें नम कर रही है।
बताया जा रहा है कि हरीश राणा के माता-पिता ने करीब 13 साल तक संतान सुख के लिए इंतजार (long wait) किया था। मन्नतों और दुआओं के बाद जब हरीश उनकी जिंदगी में आया, तो पूरा परिवार खुशियों से भर गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
13 दिन की दर्दनाक जंग (Painful Battle)
पिछले 13 दिनों से हरीश जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। अस्पताल के बेड पर उसकी हर सांस (breath) जैसे लड़ाई लड़ रही थी। मां-बाप हर पल उसके साथ खड़े रहे—उम्मीद (hope) और डर (fear) के बीच झूलते हुए।
हर दिन उन्हें यही उम्मीद रहती कि शायद आज हालत सुधर जाएगी, लेकिन धीरे-धीरे हरीश की हालत बिगड़ती चली गई। परिवार के लिए ये 13 दिन किसी नरक जैसे (worst phase) बन गए।
नम आंखों से अंतिम विदाई (Final Goodbye)
आखिरकार वो पल भी आ गया जब हरीश ने जिंदगी की जंग हार दी। आज जब उसका अंतिम संस्कार (last rites) किया गया, तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
मां-बाप की हालत देख हर किसी का दिल पसीज गया। जिस बेटे को उन्होंने सालों तक संभाला, उसी को आज “अलविदा मेरे लाल” कहकर विदा करना पड़ा।
लोगों की आंखें नम, दिलों में सवाल
हरीश की इस दर्दनाक कहानी ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित (uncertain life) है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना पर दुख जता रहे हैं और परिवार के लिए प्रार्थना (prayers) कर रहे हैं।

