Sonam Wangchuk: लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों अपनी भूख हड़ताल को लेकर लगातार चर्चा में हैं। उनकी मांगों और आंदोलन के बीच एक बार फिर लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन-से काम थे, जिनकी बदौलत सोनम वांगचुक को एशिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से नवाजा गया। आइए जानते हैं उनके उन नवाचारों और पहलों के बारे में, जिन्होंने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
शिक्षा और पर्यावरण के लिए किया अनोखा काम, इसलिए मिला बड़ा सम्मान
साल 2018 में सोनम वांगचुक को रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें लद्दाख जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और स्थानीय समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के लिए मिला था। उन्होंने ऐसे मॉडल तैयार किए, जिनका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचा।
आइस स्तूप: पानी की समस्या का देसी और वैज्ञानिक समाधान
सोनम वांगचुक का सबसे चर्चित आविष्कार आइस स्तूप है। लद्दाख में सर्दियों के दौरान बहने वाले अतिरिक्त पानी को विशेष तकनीक से शंकु के आकार की बर्फ में बदल दिया जाता है। यह बर्फ गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलती है और खेती के मौसम में किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती है। इस तकनीक को दुनिया के कई देशों ने सराहा है।
Sonam Wangchuk: ऐसे घर जो बिना हीटर के भी रहते हैं गर्म
वांगचुक ने स्थानीय मिट्टी, पुआल और प्राकृतिक संसाधनों से ऐसे भवन विकसित किए, जो सूर्य की गर्मी को दिनभर अपने भीतर संग्रहित करते हैं। रात में यही गर्मी घर के अंदर बनी रहती है। इससे अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में भी ऊर्जा की बचत होती है और रहने वालों को आरामदायक वातावरण मिलता है।
भारतीय सैनिकों के लिए तैयार किए सोलर हीटेड टेंट
ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में तैनात जवानों की मुश्किलों को देखते हुए सोनम वांगचुक ने सौर ऊर्जा से गर्म रहने वाले पोर्टेबल टेंट विकसित किए। ये टेंट दिन में गर्मी इकट्ठा करते हैं और रात में अंदर का तापमान संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे ईंधन की खपत भी कम होती है।
SECMOL: पढ़ाई का ऐसा मॉडल जिसने हजारों छात्रों की जिंदगी बदली
1988 में उन्होंने स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की शुरुआत की। इस संस्थान में पारंपरिक रटने वाली पढ़ाई के बजाय प्रैक्टिकल नॉलेज, आत्मनिर्भरता, रचनात्मक सोच और जीवन कौशल पर जोर दिया जाता है। यहां उन छात्रों को भी नया अवसर मिलता है, जिन्हें सामान्य शिक्षा प्रणाली में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
ऑपरेशन न्यू होप से सरकारी स्कूलों में आया बड़ा बदलाव
1994 में शुरू किए गए ऑपरेशन न्यू होप का उद्देश्य लद्दाख के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारना था। इस अभियान के तहत शिक्षकों के प्रशिक्षण, बेहतर पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने पर विशेष काम किया गया। इस पहल ने क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी सोच ने बनाया दुनिया का प्रेरणास्रोत
सोनम वांगचुक ने हमेशा यह साबित किया कि स्थानीय संसाधनों और वैज्ञानिक सोच के मेल से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। शिक्षा, जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। यही वजह है कि आज उनका नाम नवाचार और सामाजिक बदलाव की मिसाल के रूप में लिया जाता है।
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