Saayoni Ghosh : संसद का मानसून सत्र इस बार हंगामे और कम कामकाज के कारण चर्चा में रहा। सत्र खत्म होने के बाद तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायोनी घोष ने सदन की कार्यवाही को लेकर विपक्ष पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बचाव करते हुए कहा कि वह सदन में सवालों का जवाब देने से कभी पीछे नहीं हटते।
सायोनी घोष ने विपक्ष को घेरा
सायोनी घोष ने कहा कि संसद का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। सांसद अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं और जनता से जुड़े मुद्दे सदन में उठाने के लिए यहां आते हैं। ऐसे में अगर लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित होती है तो इसका नुकसान पूरे देश को होता है।
उन्होंने मानसून सत्र के प्रदर्शन को निराशाजनक बताते हुए कहा कि विपक्ष ने कई मौकों पर सदन की कार्यवाही में बाधा डाली और विधेयकों की प्रक्रिया में भी अपेक्षित भागीदारी नहीं की।
अमित शाह पर विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से लगातार यह आरोप लगाए गए कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद नहीं रहे और महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब नहीं दिया।
इसके जवाब में सायोनी घोष ने कहा कि अमित शाह सवालों से बचने वाले नेता नहीं हैं। उनका कहना था कि पहले भी कई मौकों पर गृह मंत्री ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया है।
घोष ने दावा किया कि समस्या अमित शाह के जवाब देने की नहीं, बल्कि विपक्ष के जवाब सुनने के लिए तैयार रहने की है। उन्होंने इसी बात को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।
संसद का कामकाज बेहद कम रहा
मानसून सत्र के कामकाज के आंकड़े भी इस बार चिंता बढ़ाने वाले रहे। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, लोकसभा ने निर्धारित समय का करीब 15 फीसदी ही इस्तेमाल किया। यह वर्ष 2004 के बाद सबसे कम उत्पादकता वाले सत्रों में शामिल रहा।
राज्यसभा का प्रदर्शन लोकसभा की तुलना में बेहतर रहा, लेकिन वहां भी निर्धारित समय का केवल करीब 33 फीसदी इस्तेमाल हुआ।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा की उत्पादकता 19 फीसदी और राज्यसभा की 39 फीसदी बताई।
पहले भी कई सत्रों में हुआ है कम काम
संसद में कम कामकाज का यह पहला मामला नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, 2010 के शीतकालीन सत्र में लोकसभा ने निर्धारित समय का सिर्फ 5 फीसदी काम किया था। 2013 के शीतकालीन सत्र में भी लोकसभा की उत्पादकता करीब 8 फीसदी रही थी।
इस लिहाज से मौजूदा मानसून सत्र भी संसद के कम उत्पादक सत्रों की सूची में शामिल हो गया है।
सायोनी घोष ने जताई नाराजगी (Saayoni Ghosh)
सायोनी घोष ने कहा कि संसद में बहस और चर्चा लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सदन को लगातार बाधित करने से जनता से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सत्रों में सभी दल सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने और गंभीर मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने पर ध्यान देंगे।

