Cancer Vaccine: कैंसर के इलाज को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने मेडिकल जगत के साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा है। अमेरिकी कंपनी Moderna और Merck की पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन Intismeran Autogene के ट्रायल में हाई-रिस्क मेलेनोमा के मरीजों के लिए उम्मीद जगाने वाले नतीजे सामने आए हैं। हालांकि, इसे अभी सामान्य मरीजों के लिए उपलब्ध कैंसर की तैयार वैक्सीन समझना सही नहीं होगा। यह एक प्रायोगिक उपचार है, जिसका अध्ययन अभी जारी है।
खास बात यह है कि इस तकनीक में हर मरीज के कैंसर की आनुवंशिक विशेषताओं को देखकर उसके लिए उपचार तैयार किया जाता है। यही वजह है कि इसे Personalized Cancer Vaccine कहा जा रहा है।
क्या कैंसर की वैक्सीन सच में बन गई है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Moderna की यह वैक्सीन कोई ऐसी वैक्सीन नहीं है जिसे स्वस्थ व्यक्ति लगवाकर कैंसर से हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाए। यह एक therapeutic cancer vaccine है, यानी इसका उद्देश्य पहले से कैंसर का इलाज करा चुके मरीजों में बीमारी के दोबारा लौटने या फैलने के खतरे को कम करना है।
Moderna और Merck के मुताबिक, Intismeran Autogene को हाई-रिस्क मेलेनोमा के मरीजों में Keytruda के साथ इस्तेमाल किया गया। ट्रायल के अंतरिम परिणामों में केवल Keytruda लेने वाले मरीजों की तुलना में बीमारी के दोबारा लौटने और फैलने के जोखिम में बेहतर परिणाम के संकेत मिले।
कैसे काम करती है Moderna की पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन?
इस तकनीक की सबसे दिलचस्प बात इसका पर्सनलाइज्ड होना है। मरीज के ट्यूमर का सैंपल लेकर उसमें मौजूद खास म्यूटेशन की पहचान की जाती है। इसके बाद उस मरीज के कैंसर की विशेषताओं के आधार पर mRNA सीक्वेंस तैयार किया जाता है।
इस mRNA के जरिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं की खास पहचान समझाने की कोशिश की जाती है। उद्देश्य यह है कि इम्यून सिस्टम उन कोशिकाओं को पहचानकर उनके खिलाफ प्रतिक्रिया दे सके, जिनमें मरीज के कैंसर से जुड़े खास संकेत मौजूद हैं।
यही mRNA तकनीक कोविड-19 महामारी के दौरान Moderna और Pfizer-BioNTech की वैक्सीन के कारण दुनियाभर में चर्चा में आई थी। लेकिन कैंसर के मामले में इसका इस्तेमाल एक अलग उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।
ट्रायल में कितने मरीज शामिल थे?
इस अध्ययन में स्टेज 2B से स्टेज 4 तक के हाई-रिस्क मेलेनोमा वाले 1,137 मरीज शामिल किए गए थे। इन मरीजों के ट्यूमर को सर्जरी के जरिए हटाया जा चुका था। इसके बाद मरीजों को अलग-अलग उपचार समूहों में रखा गया।
एक समूह को Keytruda के साथ पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन दी गई, जबकि दूसरे समूह को केवल Keytruda मिला। वैक्सीन वाले उपचार में लगभग एक साल के दौरान कई डोज दी गईं।
Cancer Vaccine: नतीजों में क्या सामने आया?
ट्रायल के अब तक सामने आए आंकड़े इस प्रयोग के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। कंपनियों के अनुसार, Keytruda के साथ Intismeran Autogene लेने वाले मरीजों में कैंसर के दोबारा लौटने या बीमारी के फैलने के जोखिम को केवल Keytruda की तुलना में कम करने के संकेत मिले हैं।
कंपनियों ने इससे पहले बताया था कि पांच साल के आंकड़ों में दोनों उपचारों के संयोजन से कैंसर की पुनरावृत्ति या मृत्यु का जोखिम करीब 49 प्रतिशत तक कम हुआ था। हालांकि, ट्रायल के विस्तृत आंकड़ों का पूरा वैज्ञानिक विश्लेषण अभी सामने आना बाकी है।
क्या हर कैंसर के मरीज को लग सकेगी यह वैक्सीन?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। मौजूदा अध्ययन मुख्य रूप से हाई-रिस्क मेलेनोमा पर केंद्रित है। कैंसर एक बीमारी नहीं बल्कि कई अलग-अलग प्रकार की बीमारियों का समूह है और हर ट्यूमर की जैविक विशेषताएं अलग हो सकती हैं।
Moderna इस तकनीक को दूसरे कैंसर में भी जांच रही है। कंपनी की ओर से शुरुआती स्तर पर फेफड़ों के कैंसर समेत अन्य ट्यूमर प्रकारों में भी इसके इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम किए जाने की बात कही गई है। लेकिन इनके प्रभावी और सुरक्षित होने की पुष्टि के लिए अलग-अलग क्लिनिकल ट्रायल जरूरी होंगे।
मरीजों को कब मिल सकती है यह कैंसर वैक्सीन?
रिपोर्ट के मुताबिक, हाई-रिस्क मेलेनोमा की सर्जरी करा चुके कुछ मरीजों के लिए इसका इस्तेमाल 2027 की शुरुआत में संभव होने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, वास्तविक उपलब्धता नियामकीय मंजूरी, अंतिम ट्रायल डेटा और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों के फैसलों पर निर्भर करेगी।
इसलिए अभी इसे बाजार में उपलब्ध सामान्य कैंसर वैक्सीन मानना सही नहीं होगा। फिलहाल यह एक विकसित हो रही व्यक्तिगत उपचार तकनीक है।
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