Bangladesh Bottle House: प्लास्टिक की खाली बोतलें आमतौर पर इस्तेमाल के बाद कचरे में चली जाती हैं, लेकिन बांग्लादेश के एक डेंटिस्ट ने इन्हीं बेकार बोतलों को अपने सपनों का घर बनाने में इस्तेमाल कर दिया। उनका यह अनोखा प्रयोग अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
बांग्लादेश के बरीशाल जिले के राजीहार गांव के रहने वाले पलाश चंद्र बरई पेशे से डेंटिस्ट हैं। उन्हें हमेशा से कुछ अलग तरह का घर बनाने का शौक था। एक दिन इंटरनेट पर प्लास्टिक की बोतलों से बने घरों के वीडियो देखने के बाद उन्हें इस आइडिया पर काम करने की प्रेरणा मिली।
हालांकि, उन्होंने केवल वीडियो देखकर घर बनाने का फैसला नहीं किया। इस तकनीक को समझने के लिए उन्होंने कई साल तक जानकारी जुटाई। इसके बाद मदारिपुर में बने एक ऐसे ही घर को देखा और वहां इस्तेमाल की गई तकनीक को करीब से समझा।
रेत से भरी बोतलों को बनाया दीवारों का आधार
इस घर की सबसे खास बात इसकी दीवारें हैं। निर्माण के दौरान खाली प्लास्टिक की बोतलों में सूखी रेत भरी गई। रेत भरने के बाद बोतलें काफी मजबूत हो गईं और उन्हें दीवार में ईंटों की तरह लगाया गया।
बोतलों को सीमेंट और मसाले की मदद से एक-दूसरे से जोड़ा गया। घर को मजबूती देने के लिए पारंपरिक निर्माण सामग्री के साथ लोहे की सरिया, सीमेंट और कंक्रीट का भी इस्तेमाल किया गया।
बाहर से देखने पर यह घर बिल्कुल सामान्य पक्का मकान जैसा दिखाई देता है। इसकी दीवारों के अंदर हजारों प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल किया गया है।
करीब 1500 वर्ग फीट में बना है घर
रिपोर्ट के मुताबिक, घर का क्षेत्रफल करीब 140 वर्ग मीटर यानी लगभग 1,512 वर्ग फीट है। इसकी ऊंचाई करीब 5.5 मीटर बताई गई है।
इस अनोखे घर को तैयार करने में लगभग 6 लाख बांग्लादेशी टका खर्च हुए, जिसकी कीमत भारतीय मुद्रा में करीब 4.5 लाख रुपये बताई गई है। कम लागत में तैयार होने के साथ-साथ इस घर ने प्लास्टिक कचरे के दोबारा इस्तेमाल का भी एक अलग उदाहरण पेश किया है।
क्या बोतलों से बना घर ज्यादा मजबूत है? (Bangladesh Bottle House)
पलाश चंद्र बरई का दावा है कि उनका घर सामान्य ईंटों से बने मकान की तुलना में ज्यादा मजबूत है और यह भूकंप तथा चक्रवात जैसी परिस्थितियों का सामना कर सकता है।
हालांकि, किसी घर की मजबूती सिर्फ उसकी दीवारों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से तय नहीं होती। उसकी नींव, बीम, कॉलम, संरचनात्मक डिजाइन और निर्माण की गुणवत्ता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए बोतलों से बना घर हर परिस्थिति में पारंपरिक मकान से ज्यादा सुरक्षित होगा, ऐसा बिना तकनीकी जांच के कहना सही नहीं होगा।
फिर भी पलाश का यह प्रयोग यह जरूर दिखाता है कि सही तकनीक और सोच के साथ प्लास्टिक कचरे को निर्माण जैसे काम में दोबारा इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। उनका बनाया यह ‘बोतल हाउस’ अब इलाके में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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