SMAM Scheme: खेती में ट्रैक्टर और दूसरी मशीनों का इस्तेमाल काम को आसान जरूर बनाता है, लेकिन इनकी कीमत इतनी ज्यादा होती है कि हर किसान के लिए इन्हें खरीदना आसान नहीं होता। ऐसे किसानों के लिए सरकार की एक योजना के तहत कृषि मशीनरी खरीदने पर आर्थिक सहायता दी जाती है। इस मदद का लाभ लेने के लिए किसानों को तय प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है।
क्या है सरकार की यह योजना?
कृषि मशीनरी पर सहायता देने वाली इस योजना का नाम Sub-Mission on Agricultural Mechanization (SMAM) है। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के साथ खेती में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत व्यक्तिगत किसान कृषि मशीनरी खरीदने के लिए सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा Custom Hiring Centre (CHC) और Farm Machinery Bank स्थापित करने के लिए भी सहायता का प्रावधान है।
किन कृषि उपकरणों पर मिल सकती है सहायता?
योजना के तहत अलग-अलग कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से ट्रैक्टर, पावर टिलर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, हैरो, सीड ड्रिल, रीपर, थ्रेशर, पावर वीडर, स्प्रेयर और हार्वेस्टर जैसे उपकरण शामिल हैं।
इसके अलावा बागवानी और फसल कटाई के बाद इस्तेमाल होने वाली कुछ मशीनरी पर भी योजना के तहत सहायता मिल सकती है।
कितनी सब्सिडी मिलती है? (SMAM Scheme)
सब्सिडी की दर किसान की श्रेणी और योजना के नियमों के आधार पर अलग हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार छोटे और सीमांत किसानों, SC/ST किसानों तथा महिला किसानों को कई मामलों में 50 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है। वहीं अन्य किसानों के लिए यह सहायता 40 प्रतिशत तक हो सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ट्रैक्टर या मशीन पर निश्चित रूप से इतनी ही सब्सिडी मिलेगी। वास्तविक राशि मशीन, राज्य, किसान की श्रेणी और उस समय लागू सरकारी दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती है।
आवेदन करने का तरीका क्या है?
कृषि मशीनरी पर सब्सिडी के लिए किसानों को सरकार के Direct Benefit Transfer in Agriculture Mechanization (DBT Agriculture Mechanization) पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होता है।
सबसे पहले किसान को पोर्टल पर Farmer Registration करना होता है। इसमें आधार के जरिए पहचान और e-KYC की प्रक्रिया पूरी की जाती है। रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करके बैंक अकाउंट, जमीन और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करनी होती है।
इसके बाद उपलब्ध मशीनों में से संबंधित उपकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है। ध्यान रखें कि हर समय सभी मशीनों के लिए आवेदन उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। यह राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्य और उपलब्धता पर निर्भर करता है।
आवेदन के बाद क्या होता है?
आवेदन जमा होने के बाद किसान को SMS के जरिए एप्लीकेशन नंबर और PIN जैसी जानकारी मिल सकती है। इसके बाद पोर्टल पर उपलब्ध अधिकृत डीलरों में से निर्धारित समय के भीतर डीलर का चयन करना होता है।
मशीन खरीदने के बाद उसके बिल, मेक, मॉडल, इंजन नंबर, चेसिस नंबर और सीरियल नंबर जैसी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाती है। इसके बाद संबंधित सरकारी अधिकारी मशीन और दस्तावेजों का सत्यापन करते हैं।
सत्यापन और आवेदन की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र किसान को सब्सिडी की राशि DBT के जरिए बैंक खाते में भेजी जाती है।
आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
आवेदन के दौरान आमतौर पर आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, जमीन से जुड़े दस्तावेज, बैंक पासबुक की कॉपी और पहचान से संबंधित अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। आवश्यक दस्तावेज राज्य और संबंधित आवेदन प्रक्रिया के अनुसार अलग भी हो सकते हैं।
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