
Dharm Visesh : अगहन का महीना शादी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस शुभ महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान राम और सीता का विवाह हुआ था। इसलिए इस दिन को विवाह पंचमी के नाम से जाना जाता है क्योंकि भगवान राम और सीता का विवाह इस दिन ही किया गया था।
विवाह पंचमी के दिन मंदिरों में भगवान राम और माता सीता का पूजा पाठ किया जाता है और आराधना की जाती है। लेकिन क्या आपको इसके महत्व के बारे में पता है, तो आईए जानते हैं इसके महत्व विस्तार से….
जानिए क्या है विवाह पंचमी का महत्व(Dharm Visesh )
त्रेता युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री राम और माता सीता का विवाह इसी खास मुहूर्त पर विवाह पंचमी के दिन हुआ था। इसी दिन तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना पुरी की इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा आराधना करने से वैवाहिक जीवन सुख में रहता है।
जानिए क्यों विवाह पंचमी को नहीं होती है शादियां
विवाह पंचमी के दिन शादी ब्याह करने की मनाही है क्योंकि इस दिन भगवान राम और माता सीधा की शादी हुई थी, यह शादी शुभ मुहूर्त में हुई थी लेकिन यह असफल शादी मानी जाती है। इस मुहूर्त में हुई शादी के बाद दोनों को दुख काटना पड़ा था और विवाह के बाद 14 वर्ष का वनवास सिर्फ और सीता हरण के बाद भगवान राम को माता सीता से बिच्छू का कष्ट रहना पड़ा था। रावण के वध के बाद माता सीता को अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ा था और अयोध्या लौटने पर उन्हें भगवान राम ने त्याग दिया इसलिए विवाह पंचमी के दिन विवाह करना अशुभ माना जाता है।
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इस दिन विवाह नहीं करने की बात कही जाती है क्योंकि इस दिन शादी करके माता सीता ने पूरी जिंदगी दुख सहायता। राम सीता का बिच्छू हो गया था यही वजह है कि लोग इस दिन विवाह नहीं करते।
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