Lunar Eclipse India 2026: भारत में जल्द ही एक ऐसा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जिसकी अवधि सामान्य से कहीं अधिक होगी। खगोलीय विशेषज्ञों के मुताबिक यह ग्रहण लगभग 3 घंटे 27 मिनट तक प्रभावी रहेगा, इसलिए इसे साल का सबसे लंबा ग्रहण माना जा रहा है। देश के कई राज्यों में लोग इस खगोलीय घटना को खुली आंखों से देख सकेंगे। खास तौर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इसकी दृश्यता बेहतर रहने की संभावना है। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगेगा।
Lunar Eclipse India 2026: इस दिन लगेगा ग्रहण
3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगेगा। खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पर उसकी छाया पड़ती है। इस बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया क्षेत्र से धीमी गति से गुजरेगा, जिसके कारण समय बढ़ जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रहण के मध्यकाल में चंद्रमा का रंग गहरा लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है। यह प्रभाव पृथ्वी के वायुमंडल में प्रकाश के अपवर्तन के कारण बनता है और दुनिया भर में इसे “ब्लड मून” के नाम से जाना जाता है।
भारत के प्रमुख शहरों में ग्रहण देखने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। पटना के तारामंडल, रांची के साइंस सेंटर और कोलकाता की खगोलीय संस्थाएं सामूहिक अवलोकन कार्यक्रम आयोजित करेंगी। विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को टेलीस्कोप से ग्रहण दिखाने की योजना है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवा आकाश प्रेमी खुले मैदानों से इस दृश्य का आनंद ले सकेंगे। चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती, इसलिए आम लोग सुरक्षित ढंग से इसे देख सकते हैं।
ग्रहण को लेकर समाज में वैज्ञानिक उत्साह के साथ-साथ सांस्कृतिक चर्चा भी शुरू हो गई है। परंपरागत मान्यताओं में ग्रहण काल को विशेष समय माना जाता है। कई परिवार इस अवधि में ध्यान, जप और स्वच्छता के नियमों का पालन करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह पूरी तरह प्राकृतिक घटना है और इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। खगोलविद बार-बार समझाते हैं कि चंद्र ग्रहण का मानव स्वास्थ्य या दैनिक जीवन पर प्रत्यक्ष दुष्प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार यदि उस रात आसमान साफ रहा तो दृश्यता और भी शानदार होगी। हल्की धुंध या बादल होने पर चंद्रमा का लाल रंग और गहरा नजर आ सकता है, जिससे फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन अवसर बनेगा। मोबाइल से तस्वीर लेने वालों को ट्राइपॉड और नाइट मोड का उपयोग करने की सलाह दी गई है। पेशेवर फोटोग्राफर अलग-अलग एक्सपोजर में शॉट लेकर इस पूरी यात्रा को टाइमलैप्स वीडियो में बदल सकते हैं।
इस लंबी अवधि वाले ग्रहण से वैज्ञानिकों को शोध के नए आयाम मिलेंगे। पृथ्वी की छाया की मोटाई, चंद्र सतह पर पड़ने वाले प्रकाश और तापमान में होने वाले बदलावों का डेटा एकत्र किया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े कुछ दल भी इस घटना का अध्ययन करेंगे। माना जा रहा है कि यह जानकारी भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और सैटेलाइट प्रोजेक्ट के लिए उपयोगी साबित होगी।
चंद्र ग्रहण केवल अंधकार का नहीं बल्कि प्रकृति के संतुलन का संदेश देता है। जब करोड़ों किलोमीटर दूर स्थित पिंड एक लय में चलते हैं, तब धरती से ऐसा अद्भुत दृश्य बनता है। भारत जैसे विशाल देश में अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक ही चंद्रमा को निहारेंगे—यह अपने आप में खूबसूरत अनुभव होगा। इसलिए 3 घंटे 27 मिनट तक रहने वाला यह ग्रहण लोगों को विज्ञान से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगला इतना लंबा ग्रहण आने में वर्षों लग सकते हैं। इसलिए आकाश प्रेमियों के लिए यह सुनहरा मौका है। परिवार के साथ छत पर बैठकर चंद्रमा को बदलते देखना नई पीढ़ी को ब्रह्मांड की समझ देगा। उम्मीद है कि यह खगोलीय घटना भारत में विज्ञान पर्यटन को भी बढ़ावा देगी और लोग अंतरिक्ष के प्रति अधिक जागरूक होंगे।
ग्रहण का संभावित समय और चरण
ग्रहण की शुरुआत में उपछाया चरण रहेगा, इसके बाद आंशिक और पूर्ण ग्रहण की स्थिति बनेगी। मध्यकाल लगभग डेढ़ घंटे तक रह सकता है और समापन के समय चंद्रमा फिर से सामान्य चमक में लौट आएगा। इतने लंबे क्रम के कारण लोग पूरी प्रक्रिया को आराम से देख पाएंगे।
कुल मिलाकर यह चंद्र ग्रहण भारत के लिए यादगार वैज्ञानिक उत्सव जैसा होगा। आसमान में बनने वाला लाल चंद्रमा हमें सृष्टि की विशालता का अहसास कराएगा। यदि आप भी इस दृश्य के साक्षी बनना चाहते हैं तो तारीख पहले से नोट कर लें और खुले स्थान का चयन करें।
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