
Tilak Significance: हिंदू धर्म में माथे पर तिलक लगाने की परंपरा बेहद प्राचीन मानी जाती है। पूजा-पाठ, व्रत, त्योहार या विशेष धार्मिक अवसरों पर लोग अलग-अलग प्रकार के तिलक लगाते हैं।
इनमें U-आकार का तिलक विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसे वैष्णव परंपरा से जुड़ा माना जाता है। यह तिलक न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी गहरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार U-आकार का तिलक भगवान विष्णु के चरणों का प्रतीक माना जाता है। इसे लगाने वाले व्यक्ति को विष्णु भक्त या वैष्णव परंपरा का अनुयायी समझा जाता है। इस तिलक के बीच में अक्सर चंदन, कुमकुम या गेरुए रंग की सीधी रेखा बनाई जाती है, जो माता लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है। इस प्रकार यह तिलक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा का संकेत माना जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से माथे के बीच का स्थान ‘आज्ञा चक्र’ या तीसरी आंख का केंद्र माना जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान पर तिलक लगाने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई लोग चंदन का U-आकार का तिलक लगाते हैं, जिससे ठंडक मिलती है और मानसिक शांति का अनुभव होता है।
U-आकार का तिलक पहचान का भी एक माध्यम रहा है। प्राचीन समय में विभिन्न संप्रदायों के लोग अपने-अपने अलग तिलक लगाकर अपनी धार्मिक परंपरा को दर्शाते थे। वैष्णव संप्रदाय में यह तिलक विशेष महत्व रखता है और मंदिरों तथा धार्मिक आयोजनों में इसे बड़े श्रद्धाभाव से लगाया जाता है।
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार तिलक लगाने से व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है और ईश्वर के प्रति श्रद्धा मजबूत होती है। इसलिए आज भी लाखों श्रद्धालु नियमित रूप से U-आकार का तिलक लगाकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
इस तरह U-आकार का तिलक केवल एक धार्मिक चिह्न नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, पहचान और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
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