8th Pay Comission: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग कई बड़े बदलाव लेकर आ सकता है। वेतन, भत्तों और पेंशन के साथ-साथ इस बार स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। खासतौर पर केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारी के मुताबिक, जिन शहरों में CGHS की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां कार्यरत कर्मचारियों को फिलहाल केवल 1,000 रुपये मासिक चिकित्सा भत्ता दिया जाता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में इलाज का खर्च कई गुना बढ़ चुका है, ऐसे में यह राशि पर्याप्त नहीं है। हाल ही में नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) (NC-JCM) की बैठक में इस भत्ते को बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी गई।
CGHS के तहत सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रित पैनल अस्पतालों में कैशलेस इलाज, ओपीडी परामर्श, दवाइयां और डायग्नोस्टिक सेवाएं प्राप्त करते हैं। लेकिन निजी अस्पतालों के बढ़ते पैकेज रेट, महंगी दवाइयों और सुपर-स्पेशलिटी उपचार की लागत को देखते हुए स्वास्थ्य कवर की सीमा बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
इसके अलावा, कर्मचारी संगठनों ने पैनल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने, पैकेज दरों की नियमित समीक्षा करने और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट व ई-रिफरल सिस्टम को सरल बनाने की मांग भी की है। बुजुर्ग पेंशनरों के लिए होम-केयर और टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार पर भी विचार हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 8वां वेतन आयोग स्वास्थ्य खर्च की वास्तविकता को ध्यान में रखकर सिफारिशें करता है, तो यह केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

