Milk crisis: देश में चल रही एलपीजी किल्लत का असर अब धीरे-धीरे रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखने लगा है। रसोई गैस की कमी ने जहां घरों की रफ्तार धीमी कर दी है, वहीं अब डेयरी उद्योग भी इसकी चपेट में आता नजर आ रहा है। डेयरी संचालकों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में दूध की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
दरअसल, दूध की पैकेजिंग और प्रोसेसिंग में एलपीजी का अहम रोल होता है। गैस की कमी के कारण कई डेयरियों को अपने कामकाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुंबई के चेंबूर इलाके में संचालित एक डेयरी के मैनेजर शारिब शेख ने बताया कि उनके पास फिलहाल पैकेजिंग के लिए सिर्फ 10 दिन का ही स्टॉक बचा है। अगर सप्लाई समय पर नहीं हुई, तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
स्थिति को और गंभीर बनाता है बाजार में मांग का घटता स्तर। होटल, रेस्टोरेंट और थोक खरीदारों ने दूध के ऑर्डर में कटौती शुरू कर दी है।
इसका सीधा असर डेयरी कारोबारियों की आय पर पड़ रहा है। कई छोटे डेयरी संचालकों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो उन्हें अस्थायी रूप से अपना काम बंद भी करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी संकट का असर सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। दूध जैसी रोजमर्रा की चीज की सप्लाई प्रभावित होने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह चिंता का विषय है।
डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस संकट को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि गैस की नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्पादन और वितरण की प्रक्रिया बाधित न हो।
अगर आने वाले 10 दिनों में हालात नहीं सुधरे, तो दूध की किल्लत हकीकत बन सकती है। ऐसे में यह जरूरी है कि समय रहते कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता को किसी बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े।

