New Labour Code Update: नई लेबर कोड व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। खासकर ₹60,000 CTC (Cost to Company) पाने वाले कर्मचारियों के मन में यह सवाल सबसे ज्यादा है कि आखिर अब उनके हाथ में कितनी सैलरी आएगी।
आइए आसान भाषा में पूरा कैलकुलेशन समझते हैं।
नई लेबर कोड के तहत बेसिक सैलरी (Basic Pay) को कुल CTC का कम से कम 50% रखना अनिवार्य किया गया है। पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखकर भत्तों (Allowances) को ज्यादा दिखाती थीं, जिससे PF और ग्रेच्युटी कम कटती थी।
लेकिन अब नियम बदल गया है।अगर किसी कर्मचारी का CTC ₹60,000 है, तो नई व्यवस्था के अनुसार उसकी बेसिक सैलरी लगभग ₹30,000 होगी। इसी बेसिक पर PF (Provident Fund) और ग्रेच्युटी की गणना होती है।
अब समझिए कटौती (Deductions):
PF (कर्मचारी हिस्सा 12%) = ₹3,600
ग्रेच्युटी (लगभग 4.81%) = ₹1,443 (यह सीधे हाथ में नहीं आता)
प्रोफेशनल टैक्स (राज्य के अनुसार) = लगभग ₹200
इन सबको मिलाकर करीब ₹5,000 से ₹5,500 तक की कटौती हो सकती है।
तो इन-हैंड सैलरी कितनी होगी?
₹60,000 CTC में से इन कटौतियों के बाद कर्मचारी को लगभग ₹44,000 से ₹47,000 तक इन-हैंड सैलरी मिल सकती है। हालांकि यह कंपनी की पॉलिसी और अन्य भत्तों पर भी निर्भर करता है।
क्या है इसका फायदा और नुकसान?
नई लेबर कोड से कर्मचारियों की PF और ग्रेच्युटी बढ़ेगी, जिससे रिटायरमेंट के समय बड़ी रकम मिलेगी। लेकिन हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है।
नई व्यवस्था लंबे समय के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, लेकिन शॉर्ट टर्म में कर्मचारियों को कम इन-हैंड सैलरी का असर महसूस हो सकता है। इसलिए सैलरी स्ट्रक्चर को समझना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

