Pension Rule Change 2026: प्रावधानों में व्यापक संशोधन कर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। यह बदलाव पेंशन गणना के फॉर्मूले, पारिवारिक पेंशन की पात्रता और महंगाई राहत जोड़ने की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से किया गया है। लंबे समय से कर्मचारी संगठन मांग कर रहे थे कि पेंशन प्रणाली को वर्तमान जरूरतों के अनुसार सुधारा जाए, जिस पर सरकार ने ठोस निर्णय लिया है।
नए नियमों के अनुसार अब पेंशन की गणना केवल अंतिम महीने के वेतन पर आधारित नहीं होगी। सेवा अवधि के दौरान मिले औसत मूल वेतन, प्रमोशन से जुड़े इंक्रीमेंट और विशेष भत्तों को भी गणना में जोड़ा जाएगा। इससे उन कर्मचारियों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा जिनकी नौकरी के आखिरी वर्षों में वेतन संरचना असमान रही। प्रारंभिक आकलन बताते हैं कि इस फॉर्मूले से मासिक पेंशन में लगभग 8 से 12 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
Pension Rule Change 2026: पेंशन के नियमों में हुआ बदलाव
पारिवारिक पेंशन को लेकर भी सरकार ने संवेदनशील रुख अपनाया है। पहले आश्रित सदस्यों को दस्तावेजी जटिलताओं के कारण भुगतान शुरू होने में महीनों लग जाते थे। अब आधार-लिंक्ड पहचान, डिजिटल सर्विस रिकॉर्ड और सिंगल विंडो वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। विधवा या विधुर के साथ-साथ दिव्यांग बच्चों, अविवाहित बेटियों और अन्य आश्रितों के लिए निरंतर पेंशन पाने की शर्तों को उदार किया गया है, जिससे परिवारों को अनावश्यक परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
महंगाई राहत (DR) की व्यवस्था को भी स्वतः मोड में लाया गया है। प्रत्येक छह माह पर DR सीधे पेंशन में जुड़ जाएगा और पेंशनभोगियों को अलग से आवेदन नहीं करना होगा। यह सुविधा कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले DA के समान होगी। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सेवानिवृत्त कर्मियों की क्रय शक्ति लंबे समय तक बनी रहेगी और बढ़ती महंगाई का दबाव कम होगा।
नेशनल पेंशन सिस्टम से जुड़े कर्मचारियों को विकल्प आधारित नई योजना में शिफ्ट होने का अवसर दिया गया है। वे चाहें तो गारंटीड मिनिमम पेंशन मॉडल अपना सकेंगे, जो काफी हद तक पुरानी पेंशन जैसी स्थिरता देगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा और किसी कर्मचारी पर जबरन शर्त नहीं थोपी जाएगी।
बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस फैसले का स्वागत हो रहा है। रेल, डाक, रक्षा लेखा, सीजीएसटी, आयकर और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों को इसका सीधा असर दिखेगा। रिटायरमेंट के करीब पहुंचे कर्मियों का कहना है कि यह सुधार भविष्य को भरोसेमंद बनाता है और सरकारी सेवा के प्रति आकर्षण को मजबूत करेगा।
सरकार का तर्क है कि देश में जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है और चिकित्सा खर्च लगातार ऊपर जा रहे हैं, इसलिए पेंशन प्रणाली का पुनर्गठन अनिवार्य था। वित्त मंत्रालय जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन, पेंशन कैलकुलेटर और हेल्पलाइन शुरू करेगा ताकि हर कर्मचारी अपने संभावित लाभ को सही ढंग से समझ सके।
कुल मिलाकर यह पेंशन नियम संशोधन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। बेहतर आय, सरल प्रक्रिया और मजबूत पारिवारिक सुरक्षा—यही इस बदलाव की असली पहचान है, जो 2026 के बाद रिटायर होने वाले हर कर्मी के जीवन को सकारात्मक दिशा देगा।
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