
RBI Action on Cooperative Bank: देश के बैंकिंग सिस्टम की निगरानी करने वाली संस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्नाटक के मंड्या जिले में स्थित Shimsha Sahakara Bank Niyamita का बैंकिंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया है। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब इस फैसले को लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही बैंक की सभी बैंकिंग सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई हैं।
RBI के इस आदेश के बाद अब यह बैंक किसी भी ग्राहक से नया पैसा जमा नहीं कर सकेगा और न ही लोन, ट्रांजैक्शन या अन्य बैंकिंग सुविधाएं दे पाएगा। यानी बैंक का सामान्य संचालन पूरी तरह बंद हो गया है। केंद्रीय बैंक ने यह कदम बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति और नियामकीय मानकों को पूरा न कर पाने के कारण उठाया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
जानकारी के अनुसार, बैंक की वित्तीय स्थिति काफी समय से खराब चल रही थी और वह RBI के कई जरूरी नियमों को पूरा करने में असफल रहा। ऐसे में जमाकर्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने यह कड़ा कदम उठाया। कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया खत्म होने के बाद RBI ने बैंक का लाइसेंस रद्द करने का अंतिम फैसला लिया।
ग्राहकों के पैसे का क्या होगा?
बैंक का लाइसेंस रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल जमाकर्ताओं के पैसे को लेकर उठता है। ऐसे मामलों में जमाकर्ताओं को सुरक्षा देने के लिए Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) की व्यवस्था लागू होती है।
इस योजना के तहत बैंक में जमा रकम पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। इसका मतलब यह है कि जिन ग्राहकों ने बैंक में पैसा जमा किया है, उन्हें DICGC के नियमों के अनुसार अधिकतम 5 लाख रुपये तक की राशि वापस मिल सकती है।
आगे क्या होगी प्रक्रिया?
लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद जमाकर्ताओं को भुगतान करने की प्रक्रिया शुरू होगी। आम तौर पर DICGC के जरिए बीमा राशि का भुगतान तय प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन जमाकर्ताओं की जमा राशि 5 लाख रुपये तक है, उन्हें अपेक्षाकृत जल्दी राहत मिल सकती है। हालांकि जिन लोगों ने इससे ज्यादा पैसा जमा किया है, उन्हें पूरी राशि वापस मिलने में कुछ समय लग सकता है।
RBI का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित रखना और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है। इसलिए बैंकिंग नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ समय-समय पर सख्त कदम उठाए जाते हैं।