
Satyam Kumar Success Story: प्रतिभा अगर मेहनत के साथ जुड़ जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं रहता। बिहार के बक्सर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर सत्यम कुमार ने ऐसा ही कर दिखाया है। महज 13 साल की उम्र में IIT-JEE जैसी कठिन परीक्षा पास कर उन्होंने देशभर में सुर्खियां बटोरीं और आज वह अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रहे हैं।
गांव से निकली असाधारण प्रतिभा (Satyam Kumar Success Story)
20 जुलाई 1999 को जन्मे सत्यम कुमार बक्सर जिले के बखोरापुर गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार खेती से जुड़ा हुआ है, लेकिन पढ़ाई को लेकर घर में हमेशा सकारात्मक माहौल रहा। कम उम्र से ही सत्यम की रुचि गणित और साइंस में गहरी थी। सामान्य स्कूली पढ़ाई के साथ उन्होंने कठिन विषयों पर खुद से अध्ययन किया, जिसने उन्हें बाकी छात्रों से अलग बना दिया।
13 साल की उम्र में IIT-JEE पास कर सबको चौंकाया
जब अधिकतर बच्चे आठवीं-नौवीं कक्षा में होते हैं, उस उम्र में सत्यम ने IIT-JEE जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षा को पास कर इतिहास रच दिया। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि उम्र नहीं, बल्कि लगन और सही दिशा में की गई मेहनत ही सफलता की असली कुंजी होती है।
IIT कानपुर से मजबूत नींव
IIT-JEE के बाद सत्यम कुमार ने IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक ड्यूल डिग्री पूरी की। इस दौरान उन्होंने केवल पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि रिसर्च, रोबोटिक्स और टेक्निकल प्रोजेक्ट्स पर भी खास ध्यान दिया। टेक फेस्ट और इनोवेशन प्रतियोगिताओं में उनके प्रोजेक्ट्स को सराहना मिली।
विदेशी स्कॉलरशिप और इंटरनेशनल अनुभव
IIT के दिनों में सत्यम को कई प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप मिलीं, जिनके जरिए उन्हें विदेश में रिसर्च का अवसर मिला। फ्रांस और अन्य देशों में किए गए प्रोजेक्ट्स ने उनकी सोच को और व्यापक बनाया। यहीं से उनका झुकाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटेलिजेंट सिस्टम्स की ओर और मजबूत हुआ।
अमेरिका में PhD और AI रिसर्च
साल 2019 में सत्यम कुमार अमेरिका गए और टेक्सास यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में PhD शुरू की। उनकी रिसर्च का फोकस AI और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर रहा, जो भविष्य में हेल्थकेयर और असिस्टिव टेक्नोलॉजी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
सत्यम कुमार की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण बड़े सपने देखने से डरते हैं। उनका सफर यह सिखाता है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।