Ajit Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति आज गहरे शोक में डूब गई। बारामती में हुए एक भीषण विमान हादसे ने राज्य को ऐसा घाव दिया है, जिसे भरने में वक्त लगेगा। इस दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के कद्दावर नेता अजित पवार का असामयिक निधन हो गया। खबर सामने आते ही पूरे प्रदेश में मातम पसर गया।
बताया जा रहा है कि यह हादसा उस वक्त हुआ, जब विमान बारामती के पास उतरने की कोशिश कर रहा था। अचानक हुए तकनीकी संकट के बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा इतना भयावह था कि विमान में सवार किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका।
टूट गया परिवार, स्तब्ध हो गया महाराष्ट्र (Ajit Pawar)
अजित पवार के निधन की खबर जैसे ही फैली, राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक हर कोई स्तब्ध रह गया। एनसीपी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने इस हादसे पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर अपूरणीय क्षति है। पवार परिवार इस समय गहरे सदमे में है।
बारामती, जिसे अजित पवार की कर्मभूमि कहा जाता है, वहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानें बंद हैं, लोग आंखों में आंसू लिए एक-दूसरे को बस यही कह रहे हैं— “यह यकीन करना मुश्किल है।”
देश के शीर्ष नेताओं ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत देश के कई बड़े नेताओं ने इस हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। सभी ने अजित पवार को एक जमीनी नेता बताया, जिनका आम लोगों से सीधा जुड़ाव था।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि अजित पवार का अचानक जाना न केवल महाराष्ट्र, बल्कि देश की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति है।
एक नेता, जो जनता के बीच रहता था
अजित पवार को उनकी सख्त प्रशासनिक शैली, तेज फैसलों और किसानों के मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जाना जाता था। वे विवादों में भी रहे, लेकिन उनकी कार्यशैली और जमीनी पकड़ ने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का मजबूत स्तंभ बना दिया था।
उनका यूं अचानक चले जाना यह सवाल छोड़ गया है कि जो नेता सुबह जनता के लिए निकलता है, वह शाम को लौटेगा भी या नहीं।
जांच जारी, जवाबों का इंतजार
फिलहाल हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। विमान दुर्घटना की तकनीकी जांच के साथ-साथ सुरक्षा पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। राज्य सरकार ने हरसंभव मदद और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।
अलविदा अजित पवार
अजित पवार का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि एक युग का अंत है। उनकी राजनीति, उनकी आवाज़ और उनका अंदाज़ हमेशा याद किया जाएगा। महाराष्ट्र आज अपने एक मजबूत सपूत को नम आंखों से विदाई दे रहा है।

