Bihar News: मकर संक्रांति पर पिता का प्रण, बेटी के मान के लिए 10 किलोमीटर पैदल चला यह बुजुर्ग, भावुक हुआ देश

Bihar News: भारत में रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि संस्कारों और जिम्मेदारियों से पहचाने जाते हैं।बिहार से सामने आई एक भावनात्मक घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पिता का प्यार किसी उम्र या हालात का मोहताज नहीं होता। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर एक बुजुर्ग पिता ने अपनी बेटी के लिए जो त्याग किया, उसने सोशल मीडिया से लेकर आम जनमानस तक सभी को भावुक कर दिया।

यह मामला बिहार के वैशाली जिले से जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक बुजुर्ग व्यक्ति कड़ाके की ठंड में पैदल चलते नजर आ रहे हैं।उनके सिर पर चूड़ा और लाई (मुरमुरा) की भारी गठरी है और हाथ में दही से भरा कैन।जानकारी के अनुसार, वे अपनी विवाहित बेटी के ससुराल मकर संक्रांति का पारंपरिक उपहार पहुंचाने के लिए करीब 10 किलोमीटर पैदल चले।

इस पूरे सफर में उनके पास न कोई वाहन था और न ही किसी तरह की सुविधा।उम्र और ठंड के बावजूद उनके कदम इसलिए नहीं रुके, क्योंकि बेटी के घर पर्व पर खाली हाथ जाना उन्हें स्वीकार नहीं था। उनके लिए यह केवल एक रस्म नहीं,बल्कि बेटी के सम्मान और मायके की प्रतिष्ठा का सवाल था।

जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर सामने आया, लोगों की भावनाएं उमड़ पड़ीं।हजारों यूजर्स ने इस बुजुर्ग पिता को सच्चा नायक बताया।किसी ने इसे बिहार की असली संस्कृति कहा, तो किसी ने इसे भारतीय पारिवारिक मूल्यों की जीवंत तस्वीर बताया।

Bihar News: जमकर वायरल हो रहा है वीडियो

इस घटना के बाद मकर संक्रांति से जुड़ी एक पुरानी परंपरा भी चर्चा में आ गई।बिहार के मिथिलांचल और आसपास के क्षेत्रों में इसे ‘भार’ या ‘जड़ाऊर’ कहा जाता है। इस परंपरा के तहत विवाहित बेटी के घर मायके से चूड़ा, दही, तिलकुट और अन्य पारंपरिक खाद्य सामग्री भेजी जाती है।यह परंपरा बेटी के प्रति स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है।

आज के समय में, जब रिश्ते अक्सर सुविधा और दिखावे तक सीमित होते जा रहे हैं,यह दृश्य समाज को एक गहरा संदेश देता है। यह बुजुर्ग पिता न तो किसी बड़े पद पर हैं
और न ही उनके पास धन-दौलत का भंडार है, लेकिन उनके संस्कार और सोच उन्हें वास्तव में समृद्ध बनाते हैं।

यह खबर उन सभी पिताओं को समर्पित है, जो बिना किसी दिखावे के अपने बच्चों के लिए हर कठिनाई सहते हैं। मकर संक्रांति पर बेटी के लिए किया गया यह 10 किलोमीटर का पैदल सफर लंबे समय तक लोगों को रिश्तों की अहमियत और भारतीय परंपराओं की मजबूती
का एहसास कराता रहेगा।

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