LPG Crisis का असर: ₹10 वाली चाय हुई ₹20, मटर पनीर और गोलगप्पे भी महंगे, आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ

LPG Crisis: देश में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति में आई दिक्कतों का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। छोटे होटल, चाय की दुकानों और ठेले वालों ने बढ़ती लागत के कारण खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।

पहले जहां सड़क किनारे मिलने वाली चाय का कप ₹10 में मिल जाता था, वहीं अब कई जगहों पर इसकी कीमत बढ़ाकर ₹15 से ₹20 कर दी गई है। दुकानदारों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर की कमी और बढ़ती लागत के कारण उन्हें मजबूर होकर कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है।

LPG Crisis से मचा हाहाकार 

सिर्फ चाय ही नहीं, बल्कि मटर पनीर, छोले-भटूरे, गोलगप्पे और अन्य स्ट्रीट फूड के दाम भी बढ़ने लगे हैं। कई ठेला और छोटे होटल संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडर की सप्लाई अनियमित होने और महंगे विकल्पों के कारण खाना बनाना पहले से ज्यादा महंगा पड़ रहा है।

खासकर छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानदारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उन्हें या तो कीमतें और बढ़ानी पड़ेंगी या फिर कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा।

ग्राहकों का भी कहना है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों के दाम बढ़ने से बजट बिगड़ने लगा है। पहले जहां लोग आसानी से बाहर चाय-नाश्ता कर लेते थे, वहीं अब लोग खर्च कम करने के लिए सोच-समझकर ही पैसे खर्च कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एलपीजी की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर और ज्यादा देखने को मिल सकता है। इससे छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं दोनों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और संबंधित एजेंसियां जल्द ही गैस आपूर्ति की स्थिति को सुधारेंगी, ताकि बाजार में बढ़ती महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सके।

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