
Holi 2026: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले का एक छोटा सा गांव अपनी अनोखी परंपरा के कारण चर्चा में रहता है। जहां देशभर में होली के रंग और खुशियां छाई रहती हैं, वहीं इस गांव में होली के दिन सन्नाटा और मातम जैसा माहौल देखने को मिलता है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 130 वर्षों से यहां होली नहीं मनाई जाती और रंग-गुलाल खेलने पर पूरी तरह रोक है।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, लगभग एक सदी पहले होली के दिन गांव में एक दुखद घटना हुई थी। बताया जाता है कि रंग खेलने के दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था, जिसमें कुछ लोगों की जान चली गई थी। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद गांव की पंचायत और बुजुर्गों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसलिए होली का त्योहार यहां नहीं मनाया जाएगा।
तब से लेकर आज तक गांव के लोग इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं। होली के दिन गांव में न तो होलिका दहन किया जाता है और न ही रंग-गुलाल खेला जाता है। यहां तक कि लोग ढोल-नगाड़े और किसी तरह के उत्सव से भी दूरी बनाए रखते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस नियम को तोड़ना अशुभ माना जाता है और इससे गांव में अनहोनी हो सकती है।
हालांकि समय के साथ नई पीढ़ी में इस परंपरा को लेकर जिज्ञासा बढ़ी है, लेकिन आज भी अधिकांश परिवार अपने पूर्वजों के फैसले का सम्मान करते हुए होली नहीं मनाते। कुछ लोग गांव से बाहर जाकर जरूर होली खेल लेते हैं, लेकिन गांव की सीमा के भीतर उत्सव नहीं मनाया जाता।
यह अनोखी परंपरा बैतूल जिले की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है। जहां एक ओर पूरे देश में होली रंगों और उमंग का प्रतीक है, वहीं यह गांव अपने इतिहास की एक दर्दनाक याद को संजोए हुए है। यही कारण है कि यहां होली का त्योहार खुशियों के बजाय एक गंभीर दिन के रूप में गुजरता है।