India Pakistan Diplomatic Move: भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में लंबे समय बाद एक अहम और भरोसेमंद मोड़ देखने को मिला है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार दोनों देशों ने एक-दूसरे को अपने-अपने न्यूक्लियर ठिकानों की सूची साझा की है। इसे दक्षिण एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
हाल के वर्षों में सीमा पर बढ़ते तनाव, सैन्य गतिविधियों और कड़े राजनीतिक बयानों के बीच यह घटनाक्रम चौंकाने वाला भी है और उम्मीद जगाने वाला भी। रक्षा विशेषज्ञ इसे कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स (CBMs) की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बता रहे हैं।
क्या है न्यूक्लियर ठिकानों की लिस्ट साझा करने का महत्व? (India Pakistan Diplomatic Move)
भारत और पाकिस्तान के बीच वर्षों से एक समझौता लागू है, जिसके तहत दोनों देश हर साल एक-दूसरे को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची सौंपते हैं, ताकि किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में इन ठिकानों पर हमला न हो। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार इस प्रक्रिया को लेकर खास चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि हालात बेहद संवेदनशील बने हुए थे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी लिस्ट का आदान-प्रदान राजनयिक माध्यमों से शांतिपूर्वक किया गया। इसमें न्यूक्लियर पावर प्लांट, रिसर्च सेंटर और अन्य संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी शामिल होती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों है यह कदम खास?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक संबंधों में तल्खी और अविश्वास का माहौल था। सीमा पर गतिविधियां तेज थीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही थी। ऐसे समय में न्यूक्लियर ठिकानों की सूची साझा होना यह संकेत देता है कि दोनों देश परमाणु सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अनजाने में होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोकने में मदद करता है और परमाणु हथियारों से जुड़े डर को कम करता है।
दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर क्या पड़ेगा असर?
भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में इनके बीच किसी भी तरह का तनाव वैश्विक चिंता का विषय बन जाता है। न्यूक्लियर ठिकानों की सूची साझा करने से न सिर्फ दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ता है, बल्कि दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिरता को भी मजबूती मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि संवाद और पारदर्शिता ही क्षेत्रीय शांति का सबसे मजबूत आधार है।
आगे क्या सुधर सकते हैं रिश्ते?
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस एक कदम से भारत-पाक संबंध पूरी तरह सुधर जाएंगे, लेकिन इतना तय है कि यह एक सकारात्मक शुरुआत है। यदि भविष्य में भी इसी तरह संवाद और समझौतों को प्राथमिकता दी गई, तो दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है।
फिलहाल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि कठिन हालात के बावजूद भी परमाणु सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर जिम्मेदारी और समझदारी बरकरार रखी जा रही है।
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