Success Story: कभी बेटी होने पर उड़ता था मज़ाक, आज वही 7 बेटियां बनीं वर्दी की शान, आटा मिल मालिक की कहानी रुला देगी

Success Story: बिहार के सारण जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सोच बदलने पर मजबूर कर देती है। यह कहानी है एक साधारण आटा मिल संचालक और उसकी सात बेटियों की, जिन्होंने साबित कर दिया कि अगर हौसले मजबूत हों तो हालात कभी आड़े नहीं आते। एकमा प्रखंड के रहने वाले कमल सिंह आज सिर्फ एक आटा मिल मालिक नहीं, बल्कि बेटियों की कामयाबी के प्रतीक बन चुके हैं।

समाज के तानों से सपनों तक का सफर (Success Story)

कमल सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। सात बेटियों के पिता होने के कारण उन्हें सामाजिक तानों, आर्थिक दबाव और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी भी बेटियों को बोझ नहीं माना। उनका एक ही सपना था—बेटियां पढ़ें, आत्मनिर्भर बनें और सम्मान की जिंदगी जिएं। इसी सोच ने उन्हें हर मुश्किल में आगे बढ़ने की ताकत दी।

पिता बने कोच, गुरु और सबसे बड़ा सहारा

कमल सिंह ने बेटियों की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी। सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई और फिजिकल ट्रेनिंग की खुद निगरानी करना उनकी दिनचर्या थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास को सबसे बड़ा हथियार बनाया। बेटियों ने भी पिता के संघर्ष को अपनी प्रेरणा बना लिया।

सात बेटियां, सात वर्दियां

आज कमल सिंह की सातों बेटियां देश और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रही हैं। बड़ी बेटी रानी कुमारी सिंह बिहार पुलिस में हैं। रेनू कुमारी सिंह SSB में, सोनी कुमारी सिंह CRPF में, प्रीति सिंह बिहार पुलिस की क्राइम ब्रांच में, पिंकी सिंह एक्साइज पुलिस में, रिंकी सिंह बिहार पुलिस में और नन्ही सिंह गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) में सेवाएं दे रही हैं। इलाके में इन्हें प्यार से ‘सेवन सिंह सिस्टर्स’ कहा जाता है।

माता-पिता के सम्मान में बना ‘सिंह सिस्टर पैलेस’

अपनी सफलता को सिर्फ निजी उपलब्धि न मानते हुए सिंह बहनों ने माता-पिता के लिए चार मंजिला मकान बनवाया, जिसका नाम रखा गया ‘सिंह सिस्टर पैलेस’। यह घर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और सम्मान की जीवंत मिसाल है।

बेटियों की ताकत, देश की प्रेरणा

कमल सिंह का एक बेटा भी है, जिसने बी.टेक की पढ़ाई पूरी की है और दिल्ली में कार्यरत है। लेकिन परिवार की पहचान उनकी बेटियां बनीं। सिंह परिवार की यह कहानी बताती है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। उन्हें सिर्फ भरोसा, अवसर और सही दिशा की जरूरत होती है।

यह कहानी सिर्फ सारण या बिहार की नहीं, बल्कि पूरे देश की सोच बदलने वाली मिसाल है—जहां बेटियां बोझ नहीं, बल्कि ‘खाकी’ की शान बन सकती हैं।

Also Read:8th Pay Commission News: आठवां वेतन आयोग लागू होने के बाद चपरासी से लेकर अफसर तक की सैलरी में कितनी बढ़ेगी, जानिए पूरा अपडेट

- Advertisement -

Related articles

Share article

- Advertisement -

Latest articles