Author: Deepika Sharma Published Date: 08/01/2025
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प्रयागराज में ऐसी ऐतिहासिक जगहें हैं जहां पर आप पवित्र स्नान करने के बाद घूम सकते हैं, 'कुंभ' स्नान सिर्फ संगम नगरी और कुंभ मेले तक ही सीमित नहीं है। अगर आपको इतिहास में दिलचस्पी है तो फिर आपको ये जगहें जरूर पसंद आएंगी...
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'कुंभ' स्नान और मेला 13 जनवरी से शुरू हो जाएगा, प्रशासन की तरफ से मेले की तैयारियों को अंतिम चरण दिया जा रहा है।
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1583 में मुगल बादशाह अकबर द्वारा बनवाया यह किला आप घूम सकते हैं, आपको यहां पर अक्षयवट पेड़, अशोक स्तंभ, भूमिगत मंदिर देखने को मिलेंगे। जो मुगल आर्किटेक्चर का एक उत्कृष्ट नमूना पेश करता है।
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यह नेहरू परिवार का निवास स्थान हुआ करता था, इसका निर्माण 1930 में मोतीलाल नेहरु ने कराया था। जिसे बाद में संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। यहां पर नेहरु परिवार और आजादी से जुड़ी जानकारियां आपको जानने का मौका मिलेगा।
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मुगल शासन के समय का यह बागीचा भी प्रयागराज में सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र है, बताया जाता है कि यह जगह राजकुमार खुसरो का आरामगाह हुआ करता था, यहां पर आपको आने के बाद बहुत ही सुकून मिलने वाला है क्योंकि यहां की प्राकृतिक सुंदरता आपको मानसिक शांति प्रदान करेगी।
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आपको बता दें कि इस आश्रम को लेकर कहा जाता है कि वनवास के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम राम, देवी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहां पर ठहरे थे, यहां पर भरत और सीता कुंड भी आपको देखने को मिलेगा।
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आपको महाकुंभ के दौरान त्रिवेणी संगम को तो जरूर देखना चाहिए, ये वो जगह है जहां पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होता है.ये तीनों नदियां संगम स्थल पर पानी के नीचे ही आपस में मिलती हैं।
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इटली के संगमरमर पत्थरों से बना एक स्ट्रक्चर है जो लोगों को बहुत पसंद आता है, ये एक छतरी है जिसके नीचे पहले रानी विक्टोरिया की मूर्ति स्थापित की गई थी, बाद में ये मूर्ति हटा ली गई लेकिन छतरी का स्ट्रक्चर अभी भी है
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