Mothers Day 2023: न्‍यू एज मदर्स के लिए रोल मॉडल हैं ये महान माएं

महाभारत के रचनाकार महर्षि वेदव्यास ने कहा था-माता के समान कोई छाया नहीं, कोई आश्रय नहीं, कोई सुरक्षा नहीं। माता के समतुल्य इस दुनिया में कोई जीवनदाता नहीं !

शिवाजी को बचपन में जीजाबाई द्वारा सुनाई गई प्रेरक कथाओं ने कुछ इस हद तक प्रभावित किया कि शौर्य, वीरता और साहस उनकी रग-रग में दौड़ने लगे। विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग व अविचल कैसे रहें, माताएं इस बात की शिक्षा अवश्य दें अपने नवांकुरों को!

शिवाजी की माता जीजाबाई

पन्नाधाय का बलिदान

पन्ना को अपने सर्वोत्कृष्ट बलिदान के लिए जाना जाता है। उन्‍होंने 1536 ईस्वी में अपने इकलौते पुत्र चंदन की बाल्यावस्था में ही बलिदान देकर मेवाड़ राज्य के कुलदीपक उदयसिंह की रक्षा की थी। इस मां से सीखें “स्व” का त्याग कर किस प्रकार वचनबद्ध रहा जाए। इन्हीं गुणों को नई पीढ़ी में संचारित करने का माध्यम बन सकती हैं आप !

कठोर प्रतिज्ञा, परिश्रम व कर्त्तव्य-परायणता जैसी योग्यताओं से निपुण गंगा-पुत्र भीष्म को बचपन से ही माता द्वारा अपने वादे से न मुकरने और आजीवन सिद्धांतों का पालन करने की जो शिक्षा दी गई, अगर आज की माएं ये सीख अपने शिशुओं को घुट्टी में पिला दें, तो देश के ये भावी कर्णधार चरित्र से सुदृढ़ व सुसंस्कृत हो सकेंगे ।

गंगा ने ही तो गढ़ा था भीष्‍म को

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कौशल्या द्वारा श्रीराम को कई गुणों से सिंचित व सुसज्जित किया गया । ये माता कौशल्या के ही सद्चरित्र का प्रताप था कि श्रीराम दया, प्रेम, दान, करुणा व मर्यादा की मिसाल बन गए। पुरुषोत्तम की उपाधि उन्होंने यूं ही नहीं प्राप्त कर ली थी। याद रखें — बच्चों को यदि राम बनाना है, तो माताओं को भी कौशल्या बनना होगा !

राम बनाना है तो बनना होगा कौशल्‍या

अपने दोनों पुत्रों लव-कुश के लालन-पालन में कोई कसर न छोड़ने वाली, अकेली पड़ गईं माता सीता ने हरसंभव प्रयास कर उनकी शिक्षा-दीक्षा को सम्पन्न कराया। जिस प्रकार लव-कुश ने श्रीराम के समक्ष निडर होकर अपनी बात कहने का साहस दिखाया, उसी प्रकार माएं युवा बालक-बालिकाओं को बेझिझक अपने पक्ष को प्रस्तुत करने की सीख दें।

सीता ने नहीं हारी हिम्‍मत

कण्व ऋषि के आश्रम में वास करने वाली शकुंतला ने अदम्य पराक्रम के धनी भरत को जन्म दिया, जिसके बाल्यावस्था में ही शेर के दांत गिनने की कथा बहुप्रचलित है। पिता दुष्यंत का सान्निध्य न मिल पाने के बावज़ूद, माता शकुंतला ने पुत्र भरत को अच्छी परवरिश देने के लिए ज़मीन-आसमान एक कर दिए। देखा जाए तो ये प्रेरक-प्रसंग आज की ‘सिंगल मदर्स ‘ के लिए इंस्पिरेशनल है।

शकुंतला का पराक्रमी पुत्र भरत

अभिमन्यु, अपनी मां सुभद्रा के गर्भ में ही पिता अर्जुन से किए जा रहे वार्तालाप के चलते, चक्रव्यूह को भेदना जान गया था। अभिमन्यु, अपनी मां सुभद्रा के गर्भ में ही पिता अर्जुन से किए जा रहे वार्तालाप के चलते, चक्रव्यूह को भेदना जान गया था।

सुभद्रा न होती, अभिमन्‍यु न होता

ओलंपिया थीं तो बना सिकंदन महान

मां ओलंपिया ने सिकंदर को कम उम्र में ही युद्ध-कौशल में दक्ष बनाकर उसे राजनीति, रणनीति व रिपुदमन तकनीक के ग़ुर सिखलाए। वांछित लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सच्ची लगन, कड़ी मेहनत व पक्के इरादे से जुट जाने की शिक्षा देकर, इस युग की माताएं एक कर्मठ पीढ़ी के निर्माण में अपनी सफल भूमिका निभा सकती हैं।

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