Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। Israel द्वारा Iran पर किए गए ताजा हमलों के बाद पूरे विश्व में चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह टकराव अगर लंबा चला तो इसका असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। सबसे बड़ी चिंता तेल की सप्लाई को लेकर जताई जा रही है, क्योंकि मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे अहम तेल उत्पादन क्षेत्र माना जाता है।
जानकारों के अनुसार इस संघर्ष से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। जैसे ही युद्ध की खबरें सामने आईं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर आशंकाएं तेज हो गईं।
अगर हालात और बिगड़ते हैं या समुद्री रास्तों से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होने का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। कुछ आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि गंभीर संकट की स्थिति में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं।
हालांकि अभी ₹200 प्रति लीटर पेट्रोल का कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है, लेकिन तेल की कीमतों में तेज उछाल होने पर ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है।
इस तनाव का असर वित्तीय बाजारों में भी देखने को मिल सकता है। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश करते हैं, जिससे सोने की कीमतों में तेजी आ सकती है। दूसरी ओर शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना रहती है, क्योंकि ऐसे समय विदेशी निवेशक जोखिम कम करने की कोशिश करते हैं।
तेल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों, रोजमर्रा के सामान और सेवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। यानी मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव आम लोगों की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर ईरान की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है। ऐसे में वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और महंगाई का दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
यह टकराव आगे किस दिशा में जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि मिडिल ईस्ट की यह हलचल पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन चुकी है।

