Success Story: 8 बार मेन्स, 9 साल की तपस्या, ‘जब तक सेलेक्शन नहीं, तब तक शादी नहीं’ की जिद ने मयंका चौरसिया को बनाया DSP

Success Story: आंखों में बड़ा सपना हो और उसे पूरा करने की जिद हो, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से आने वाली मयंका चौरसिया की कहानी इसी जिद और संघर्ष की मिसाल है। 9 साल तक लगातार मेहनत, 8 बार मेन्स परीक्षा और 4 बार इंटरव्यू देने के बाद नवंबर 2025 में मयंका का चयन MPPSC के तहत DSP पद पर हुआ।

मयंका चौरसिया मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर कस्बे की रहने वाली हैं। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन मयंका ने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया।

इंजीनियरिंग से सिविल सर्विस तक का सफर (Success Story)

मयंका ने भोपाल के बंसल कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सर्विसेज में जाना है। साल 2016 से उन्होंने UPSC और MPPSC की तैयारी शुरू कर दी।

शुरुआती वर्षों में मयंका कई बार प्रीलिम्स परीक्षा में सफल रहीं, लेकिन मेन्स परीक्षा में बार-बार असफलता मिली। हर असफल प्रयास के बाद उन्होंने खुद को और बेहतर करने पर ध्यान दिया।

इंटरव्यू तक पहुंचकर टूटा सपना, लेकिन नहीं टूटा हौसला

साल 2019 और 2020 में मयंका इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन फाइनल मेरिट लिस्ट में नाम न आने से उन्हें गहरा झटका लगा। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। 2021 में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण परीक्षा बीच में छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय MPPSC पर फोकस बढ़ा दिया।

शादी पर रोक, पहले वर्दी का सपना

लंबे संघर्ष के दौरान मयंका पर सामाजिक दबाव भी बढ़ने लगा। शादी को लेकर बातें होने लगीं, लेकिन उन्होंने साफ फैसला कर लिया कि जब तक सेलेक्शन नहीं होगा, तब तक शादी नहीं करेंगी। मयंका का कहना था कि उनके जीवन में पहले DSP की वर्दी आएगी, उसके बाद बाकी फैसले होंगे।

8 बार मेन्स, 4 इंटरव्यू और आखिरकार सफलता

मयंका ने कुल 8 बार मेन्स परीक्षा दी और 4 बार इंटरव्यू तक पहुंचीं। तीन बार इंटरव्यू में असफल रहीं, लेकिन चौथी बार उनकी मेहनत रंग लाई। नवंबर 2025 में जारी MPPSC रिजल्ट में मयंका ने 10वीं रैंक हासिल की और DSP पद के लिए चयनित हुईं।

मयंका चौरसिया की सफलता कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफलता के बाद अपने सपनों से समझौता करने लगते हैं। उनका सफर बताता है कि अगर इरादे मजबूत हों और लक्ष्य साफ हो, तो देर से ही सही, मंजिल जरूर मिलती है।

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