Gupt Navratri 2026: 12 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, 15 जुलाई से शुरू होंगे मां दुर्गा के नौ पावन दिन, जानें क्यों है बेहद खास

Gupt Navratri 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाना, नियमित पूजा-पाठ करना और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की आराधना करना शुभ माना जाता है।

Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि इस बार बेहद शुभ और दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के साथ शुरू होने जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करीब 12 साल बाद गजकेसरी योग में गुप्त नवरात्रि का आरंभ होगा।

ऐसे में मां दुर्गा की आराधना, साधना और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जा रहा है। आइए जानते हैं गुप्त नवरात्रि कब से शुरू हो रही है, कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं और इन नौ दिनों का धार्मिक महत्व क्या है।

15 जुलाई से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से 15 जुलाई 2026 को गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा। यह पर्व लगातार नौ दिनों तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों श्रद्धा और विधि-विधान से की गई उपासना विशेष फलदायी होती है।

12 साल बाद बन रहा गजकेसरी योग, इसलिए बढ़ गया महत्व

इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग जैसे दुर्लभ संयोग में हो रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनने वाला गजकेसरी योग लगभग 12 वर्षों बाद इस रूप में बन रहा है। इसलिए इस बार की गुप्त नवरात्रि को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

इन शुभ योगों में नए काम शुरू करना माना जाता है मंगलकारी

गुप्त नवरात्रि के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग जैसे शुभ संयोग भी बनेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत, व्यापार से जुड़े फैसले, बैंकिंग कार्य, निवेश, तकनीकी परियोजनाओं और कार्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करना शुभ माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि में क्यों होती है विशेष साधना? (Gupt Navratri 2026)

धार्मिक परंपराओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि देवी साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक उपासना का विशेष पर्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के साथ दस महाविद्याओं की आराधना का भी महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से सुख, शांति और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।

साल में चार बार आती है नवरात्रि, लेकिन गुप्त नवरात्रि क्यों है अलग?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है, जबकि आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती है। यह पर्व विशेष रूप से साधना और देवी उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाना, नियमित पूजा-पाठ करना और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की आराधना करना शुभ माना जाता है। धार्मिक विषय आस्था से जुड़े होते हैं, इसलिए श्रद्धालु अपनी परंपरा और विश्वास के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

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