Cancer Disease : कैंसर की पहचान में नया मोड़! अब एक ब्लड टेस्ट से शुरुआती खतरे का चल सकेगा पता

Cancer Disease : वैज्ञानिक एक ऐसी नई तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिससे केवल एक छोटे से ब्लड सैंपल के जरिए कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाने की उम्मीद बढ़ी है। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो भविष्य में लाखों मरीजों को समय रहते इलाज मिल सकता है।

Cancer Disease : कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की समय पर पहचान लंबे समय से मेडिकल साइंस के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में रही है। अधिकतर मामलों में बीमारी का पता तब चलता है, जब वह काफी आगे बढ़ चुकी होती है। हालांकि अब वैज्ञानिक एक ऐसी नई तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिससे केवल एक छोटे से ब्लड सैंपल के जरिए कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाने की उम्मीद बढ़ी है। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो भविष्य में लाखों मरीजों को समय रहते इलाज मिल सकता है।

साधारण ब्लड टेस्ट से मिल सकते हैं कैंसर के शुरुआती संकेत

नई तकनीक में लिक्विड बायोप्सी नामक आधुनिक जांच पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस टेस्ट का उद्देश्य खून में मौजूद कैंसर से जुड़े बेहद सूक्ष्म डीएनए अंशों की पहचान करना है। कई बार ये संकेत इतने शुरुआती स्तर पर होते हैं कि सामान्य स्कैनिंग तकनीक भी उन्हें नहीं पकड़ पाती। ऐसे में यह जांच बीमारी की जल्द पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

7,000 मरीजों पर चल रहा बड़ा क्लिनिकल अध्ययन

इस रिसर्च के तहत करीब 7,000 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया है, जिनका कैंसर का इलाज पहले ही पूरा हो चुका है। आने वाले वर्षों में उनके ब्लड सैंपल की नियमित जांच की जाएगी, ताकि यह समझा जा सके कि यह तकनीक कैंसर के दोबारा लौटने का संकेत कितनी सटीकता से दे सकती है।

रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर जल्दी शुरू हो सकेगा इलाज (Cancer Disease)

अगर ब्लड टेस्ट में कैंसर से जुड़े अवशेष मिलते हैं, तो मरीजों को समय रहते इम्यूनोथेरेपी या अन्य आधुनिक उपचार दिए जा सकते हैं। वहीं जिन मरीजों की रिपोर्ट सामान्य आती है, उन्हें अनावश्यक कीमोथेरेपी या रेडिएशन जैसी प्रक्रियाओं से बचाया जा सकता है। इससे इलाज के दुष्प्रभाव भी कम हो सकते हैं।

एक नहीं, कई प्रकार के कैंसर पर हो रही है जांच

शोधकर्ता इस तकनीक को केवल एक प्रकार के कैंसर तक सीमित नहीं रखना चाहते। अध्ययन के दौरान यह भी परखा जा रहा है कि अलग-अलग तरह के कैंसर की पहचान और निगरानी में यह ब्लड टेस्ट कितना प्रभावी साबित होता है। मरीजों की कई वर्षों तक निगरानी की जाएगी ताकि सटीक परिणाम सामने आ सकें।

विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

हालांकि शुरुआती नतीजे उत्साहजनक माने जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस तकनीक को नियमित चिकित्सा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इसे व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले बड़े क्लिनिकल ट्रायल पूरे होने और पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण जुटाना जरूरी है।

एक मरीज के अनुभव ने बढ़ाई उम्मीद

क्लिनिकल ट्रायल में शामिल एक मरीज के मामले में ब्लड टेस्ट के जरिए कैंसर के बचे हुए संकेत समय रहते सामने आए। इसके बाद उन्हें नई इम्यूनोथेरेपी दी गई और इलाज के बाद उनकी रिपोर्ट लगातार सामान्य बनी रही। इस तरह के अनुभव वैज्ञानिकों को आगे की रिसर्च के लिए नई उम्मीद दे रहे हैं।

भविष्य में बदल सकती है कैंसर जांच की तस्वीर

यदि आने वाले वर्षों में यह तकनीक सभी परीक्षणों में सफल साबित होती है, तो कैंसर की पहचान और उसकी निगरानी का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।

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