Credit Card Rules: आज के समय में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि यदि किसी क्रेडिट कार्ड धारक की अचानक मृत्यु हो जाए, तो उसके कार्ड का बकाया भुगतान कौन करेगा? क्या परिवार के सदस्यों को अपनी जेब से यह रकम चुकानी पड़ती है या बैंक खुद नुकसान उठाता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ऐसे मामलों में कानून और बैंकिंग नियम क्या कहते हैं।
क्या परिवार पर आता है पूरा कर्ज?
यदि क्रेडिट कार्ड केवल मृत व्यक्ति के नाम पर था, तो उसके परिवार के सदस्य अपने निजी पैसों से कर्ज चुकाने के लिए बाध्य नहीं होते। सबसे पहले बैंक मृतक की संपत्ति से बकाया राशि की वसूली करने की प्रक्रिया अपनाता है। इसमें बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, निवेश, वाहन, मकान या अन्य ऐसी संपत्तियां शामिल हो सकती हैं, जो कानूनी रूप से मृतक के नाम पर हों।
लीगल वारिस की जिम्मेदारी कितनी होती है?
भारतीय कानून के अनुसार कानूनी वारिस की जिम्मेदारी केवल उतनी ही होती है, जितनी कीमत की संपत्ति उसे विरासत में मिली है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति पर 2 लाख रुपये का बकाया है और वारिस को केवल 1 लाख रुपये की संपत्ति मिली है, तो उससे 2 लाख रुपये की वसूली नहीं की जा सकती। उसकी जिम्मेदारी केवल विरासत में मिली संपत्ति के मूल्य तक ही सीमित रहती है।
जॉइंट क्रेडिट कार्ड होने पर बदल जाते हैं नियम (Credit Card Rules)
अगर क्रेडिट कार्ड संयुक्त (Joint Credit Card) है, तो जीवित जॉइंट कार्ड होल्डर पूरे बकाया भुगतान के लिए जिम्मेदार माना जाता है। वहीं यदि कोई व्यक्ति केवल अधिकृत उपयोगकर्ता (Authorised User) है, तो उसे व्यक्तिगत रूप से उस कर्ज का भुगतान करने की कानूनी जिम्मेदारी नहीं होती।
मौत के बाद सबसे पहले क्या करें?
कार्डधारक के निधन की जानकारी मिलते ही परिवार को तुरंत संबंधित बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी को सूचना देनी चाहिए, ताकि कार्ड ब्लॉक किया जा सके और कोई नया लेनदेन न हो। इसके बाद बैंक की मांग के अनुसार डेथ सर्टिफिकेट, लीगल हेयर सर्टिफिकेट, वसीयत या सक्सेशन सर्टिफिकेट जैसे जरूरी दस्तावेज जमा करने चाहिए। साथ ही बकाया स्टेटमेंट लेकर सभी ट्रांजैक्शन की जांच भी कर लेनी चाहिए।
अगर संपत्ति कम और कर्ज ज्यादा हो तो क्या होगा?
ऐसी स्थिति में बैंक उपलब्ध संपत्ति के आधार पर रिकवरी की कोशिश करता है। यदि पूरी राशि वसूल नहीं हो पाती, तो कई मामलों में बैंक समझौते (Settlement) का विकल्प दे सकता है या नियमों के अनुसार बकाया राशि का कुछ हिस्सा राइट-ऑफ भी किया जा सकता है। हालांकि यह निर्णय हर मामले की परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता है।
मृत व्यक्ति का क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ सकता है भारी
कार्डधारक की मृत्यु के बाद उसके क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना कानूनन गलत माना जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर कार्ड का इस्तेमाल करता है, तो इसे धोखाधड़ी की श्रेणी में रखा जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए कार्ड को तुरंत बंद करवाना सबसे सुरक्षित कदम माना जाता है।
रिकवरी एजेंट क्या नहीं कर सकते?
बैंक या रिकवरी एजेंट कानूनी वारिसों को धमका नहीं सकते और न ही विरासत में मिली संपत्ति की कीमत से अधिक रकम की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा गलत जानकारी देकर दबाव बनाना या अनावश्यक समय पर कॉल करना भी नियमों के खिलाफ माना जाता है।
क्या परिवार के क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है?
सिर्फ कार्डधारक की मृत्यु होने से परिवार के अन्य सदस्यों के क्रेडिट स्कोर पर कोई असर नहीं पड़ता। यदि वे जॉइंट कार्ड होल्डर नहीं हैं, तो उनका क्रेडिट रिकॉर्ड अलग ही रहता है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में परिवार के अन्य सदस्यों को इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं होती।
भविष्य में विवाद से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सभी बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड, लोन और निवेश की जानकारी व्यवस्थित रूप से लिखकर रखें। समय-समय पर वसीयत अपडेट करें, जरूरत पड़ने पर क्रेडिट कार्ड प्रोटेक्शन या इंश्योरेंस का विकल्प लें और परिवार के भरोसेमंद सदस्य को अपनी वित्तीय जानकारी जरूर दें। इससे किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में कानूनी और आर्थिक परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं।
तमाम खबरों के लिए हमें Facebook पर लाइक करें Google News, Twitter और YouTube पर फॉलो करें।Vidhan News पर विस्तार से पढ़ें ताजा–तरीन खबर।

