BPSC Success Story: कोचिंग के बिना बनीं SDM, 288वीं रैंक ने बदली प्रेरणा प्रणय की पहचान

BPSC Success Story: प्रेरणा प्रणय ने बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी के जरिए BPSC में 288वीं रैंक हासिल की और SDM बनीं। जानिए उनकी तैयारी का तरीका और सफलता से मिलने वाली सीख।

BPSC Success Story: यूपीएससी के बाद सबसे कठिन परीक्षा स्टेट पीसीएस मानी जाती है। इस परीक्षा को पास करना बहुत ही कठिन होता है और इसके लिए बच्चे महंगे महंगे कोचिंग का सहारा भी लेते हैं। लेकिन कई ऐसे बच्चे हैं जो बिना किसी कोचिंग के ही इस कठिन परीक्षा को पास कर दिखाते हैं।

आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी बताएंगे जिसे बिना किसी महंगे कोचिंग के BPSC जैसे कठिन परीक्षा को पास कर दिखाया। इस लड़की ने साबित कर दिया कि बिना कोचिंग भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

महंगी कोचिंग नहीं, पढ़ाई के तरीके पर दिया ध्यान

प्रेरणा की कहानी इसलिए अलग नजर आती है क्योंकि उन्होंने अपनी तैयारी के लिए कोचिंग को जरूरी नहीं माना। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के जरिए खुद पढ़ाई की और अपनी तैयारी को परीक्षा की जरूरत के हिसाब से आगे बढ़ाया।इंटरनेट और ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल उनके लिए तैयारी के अहम साधन रहे। इसके साथ उन्होंने किताबों की मदद ली और अपनी पढ़ाई को नियमित बनाए रखने की कोशिश की।

तैयारी में सिर्फ पढ़ना नहीं था लक्ष्य

प्रेरणा ने पढ़ाई को केवल ज्यादा घंटे बैठने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पहले यह समझने पर ध्यान दिया कि BPSC में उनसे किस तरह की तैयारी की अपेक्षा है। इसी आधार पर उन्होंने सिलेबस को समझा और जरूरी विषयों की तैयारी की।पढ़े हुए टॉपिक को दोबारा देखना उनकी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। लगातार रिवीजन के जरिए उन्होंने पहले से तैयार किए गए विषयों को मजबूत करने पर जोर दिया।

मेन्स की तैयारी में लिखने की आदत बनी मददगार

BPSC की मुख्य परीक्षा में जानकारी के साथ उसे प्रभावी तरीके से लिखना भी जरूरी होता है। प्रेरणा ने इस हिस्से को नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने आंसर राइटिंग की नियमित प्रैक्टिस की।

इससे उन्हें निर्धारित समय में उत्तर पूरा करने और अपनी बात बेहतर ढंग से रखने का अभ्यास मिला। यानी उनकी तैयारी सिर्फ किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि परीक्षा हॉल में उस ज्ञान को इस्तेमाल करने की भी कोशिश की गई।

मुश्किल समय में भी तैयारी नहीं छोड़ी (BPSC Success Story)

किसी भी लंबी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान उतार-चढ़ाव आते हैं। प्रेरणा के सफर में भी ऐसे दौर आए, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा। उनके लिए निरंतर पढ़ाई और अपनी रणनीति पर टिके रहना महत्वपूर्ण रहा।

आखिरकार उनकी मेहनत का परिणाम BPSC रिजल्ट में सामने आया और उन्होंने 288वीं रैंक हासिल कर SDM बनने का रास्ता तय किया।

दूसरे अभ्यर्थियों के लिए क्या संदेश है?

प्रेरणा प्रणय की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तैयारी के लिए उपलब्ध संसाधनों से ज्यादा उनका सही इस्तेमाल मायने रखता है। हर अभ्यर्थी की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी दूसरे की तैयारी की हूबहू नकल करने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार रणनीति बनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

उनकी सफलता उन छात्रों के लिए खास तौर पर प्रेरणा देती है, जो कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते या किसी कारण से सेल्फ स्टडी के जरिए तैयारी कर रहे हैं।

प्रेरणा प्रणय की 288वीं रैंक सिर्फ एक रिजल्ट नहीं, बल्कि उन अभ्यर्थियों के लिए एक उदाहरण है जो सीमित संसाधनों के बावजूद BPSC जैसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि सही दिशा में लगातार की गई सेल्फ स्टडी भी सफलता तक पहुंचने का रास्ता बन सकती है।

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