Bihar News: बेगूसराय के रतनपुर गांव में शुक्रवार का दिन एक परिवार के लिए कभी न भूल पाने वाला बन गया। घर का बेटा और बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटा, लेकिन उनकी चार साल की बेटी दीक्षा इस सच्चाई से अनजान थी कि अब उसके पापा कभी घर वापस नहीं आएंगे। पिता के बारे में पूछे जाने पर बच्ची ने जिस मासूमियत से जवाब दिया, उसे सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
बेटी की बातों में पिता के लौटने का भरोसा
दीक्षा ने अपने पापा को लेकर कहा कि वह ठीक हैं और उससे बहुत प्यार करते हैं। छोटी सी बच्ची के लिए पिता की मौजूदगी अभी भी उसकी दुनिया का हिस्सा थी। उसे इस बात का एहसास नहीं था कि जिस शख्स को वह अपना सबसे प्यारा सहारा मानती है, वह अब हमेशा के लिए उससे दूर हो चुका है।
अंतिम विदाई के दौरान बच्ची अपने पिता को वापस लाने की बात कहती रही। उसके मासूम सवालों का जवाब देना वहां मौजूद लोगों के लिए भी आसान नहीं था। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद इसे देखने वाले लोग भी भावुक हो रहे हैं।
2004 में शुरू हुई थी देश सेवा की यात्रा
मनीष कुमार सिंह ने वर्ष 2004 में बीएसएफ की 157वीं बटालियन के साथ अपनी सेवा शुरू की थी। करीब दो दशक तक वह देश की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। उनकी वर्तमान तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में थी।
ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। उनका इलाज भी कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सका और उनका निधन हो गया। जवान की मौत की खबर जैसे ही रतनपुर पहुंची, परिवार के साथ पूरा गांव शोक में डूब गया।
पिता को कंधा देते समय छलक पड़े आंसू (Bihar News)
मनीष की अंतिम यात्रा के दौरान परिवार का दर्द साफ दिखाई दिया। उनकी पत्नी रीना कुमारी और बड़ी बेटी मुस्कान गौतम ने भी पार्थिव शरीर को कंधा दिया। यह दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।
पत्नी और दोनों बेटियों के लिए यह सिर्फ अंतिम विदाई नहीं थी, बल्कि उस व्यक्ति से बिछड़ने का पल था, जो उनके परिवार का अहम हिस्सा था। 13 वर्षीय मुस्कान नौवीं कक्षा में पढ़ती है, जबकि चार वर्षीय दीक्षा अभी प्ले स्कूल जाती है।
सिमरिया घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
मनीष कुमार सिंह का अंतिम संस्कार सिमरिया घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिचित अंतिम यात्रा में शामिल हुए। गांव के लोगों ने जवान की देश सेवा को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मनीष के लिए यह गांव की आखिरी यात्रा थी, लेकिन उनकी चार साल की बेटी के मन में पिता की वही छवि रहेगी, जिसमें पापा उसे प्यार करते हैं। शायद यही वजह थी कि अंतिम विदाई के बीच उसके मासूम शब्दों ने पूरे माहौल को और ज्यादा भावुक कर दिया।

