Neem Karoli Baba Wife: नीम करोली बाबा का नाम देश के उन संतों में लिया जाता है, जिनकी लोकप्रियता भारत से निकलकर विदेशों तक पहुंची। उत्तराखंड के कैंची धाम में आज भी उनके अनुयायियों की बड़ी आस्था है। बाबा की साधना, उनके आश्रम और उनसे जुड़ी घटनाओं के बारे में तो काफी कुछ पढ़ने-सुनने को मिलता है, लेकिन उनके परिवार की चर्चा अपेक्षाकृत कम होती है। खासतौर पर उनकी पत्नी के जीवन को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा रहती है।
नीम करोली बाबा का गृहस्थ जीवन भी रहा था और उनका विवाह कम उम्र में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम राम बेटी देवी बताया जाता है। बाबा के जीवन ने जब आध्यात्मिक मोड़ लिया और वह लंबे समय तक घर से दूर रहने लगे, तब पीछे रह गए परिवार की जिम्मेदारियां उनकी पत्नी ने संभालीं। यही उनके जीवन का वह पहलू है, जो बाबा की प्रसिद्ध आध्यात्मिक छवि से बिल्कुल अलग नजर आता है।
कम उम्र में ही विवाह के बंधन में बंध गए थे बाबा
नीम करोली बाबा के शुरुआती जीवन का संबंध उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद क्षेत्र के अकबरपुर गांव से बताया जाता है। उनका बचपन सामान्य ग्रामीण परिवेश में बीता, लेकिन आगे चलकर उनका रुझान अध्यात्म की ओर बढ़ता गया। इसी दौर में उनका विवाह राम बेटी देवी से हुआ। उस समय कम उम्र में विवाह होना ग्रामीण समाज में असामान्य बात नहीं थी।
विवाह के बाद भी उनका मन सांसारिक जीवन में पूरी तरह नहीं लगा। आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ते हुए उन्होंने घर से दूरी बना ली और अलग-अलग स्थानों की यात्राएं शुरू कर दीं। आगे चलकर यही साधना उनके जीवन की पहचान बन गई और लोग उन्हें नीम करोली बाबा के नाम से जानने लगे।
बाबा के घर से दूर जाने के बाद पत्नी ने क्या किया?
नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक सफर का सबसे बड़ा असर उनके पारिवारिक जीवन पर पड़ा। एक ओर बाबा साधना और यात्राओं में व्यस्त होते गए, दूसरी ओर परिवार की रोजमर्रा की जिम्मेदारियां घर पर ही चलती रहीं। ऐसे समय में राम बेटी देवी ने गृहस्थी को संभालने की भूमिका निभाई।
उनका जीवन बाबा की तरह सार्वजनिक नहीं हुआ। उन्होंने किसी आश्रम या धार्मिक संस्था के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश नहीं की। उपलब्ध विवरणों से यही पता चलता है कि उन्होंने परिवार और निजी जीवन को ही प्राथमिकता दी और प्रसिद्धि से दूरी बनाए रखी।
क्या बाबा ने परिवार से पूरी तरह नाता तोड़ लिया था? (Neem Karoli Baba Wife)
नीम करोली बाबा को अक्सर संन्यासी के रूप में याद किया जाता है, इसलिए यह सवाल स्वाभाविक है कि घर छोड़ने के बाद उनका अपने परिवार से रिश्ता कैसा रहा। उनके जीवन से जुड़े विवरणों में यह संकेत मिलता है कि आध्यात्मिक मार्ग पर जाने के बावजूद परिवार से उनका संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
बताया जाता है कि वह समय-समय पर अपने गांव और परिवार की ओर लौटते थे। हालांकि उनका ज्यादातर समय साधना, यात्राओं और बाद में अपने अनुयायियों के बीच बीतने लगा था। इस तरह उनके जीवन में एक तरफ आध्यात्मिक जिम्मेदारियां बढ़ती गईं तो दूसरी तरफ पारिवारिक संबंध भी किसी न किसी रूप में बने रहे।
राम बेटी देवी का जीवन क्यों रहा इतना गुमनाम?
राम बेटी देवी का नाम आज मुख्य रूप से नीम करोली बाबा की पत्नी के रूप में ही सामने आता है। उनके अपने जीवन के बारे में सार्वजनिक रिकॉर्ड और विस्तृत जानकारी बहुत सीमित है। इसकी बड़ी वजह यह रही कि उन्होंने खुद को बाबा की प्रसिद्धि से अलग रखा।
जब बाबा के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और उनके नाम से आश्रम प्रसिद्ध होने लगे, तब भी राम बेटी देवी की जिंदगी निजी दायरे में ही रही। उन्होंने संत की पत्नी होने का सार्वजनिक लाभ लेने के बजाय सामान्य पारिवारिक जीवन को महत्व दिया। इसी वजह से उनकी कहानी बाबा की जीवनी के दूसरे हिस्सों की तुलना में कम चर्चा में रही।
बाबा के परिवार में कौन-कौन था?
नीम करोली बाबा के पारिवारिक जीवन को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग जानकारियां मिलती हैं। उनके बच्चों की संख्या और नामों को लेकर भी सभी जगह एक जैसी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस विषय में किसी एक ऑनलाइन विवरण को अंतिम सत्य मानना ठीक नहीं होगा।
कुछ विवरणों में उनके परिवार में बेटे और बेटी का उल्लेख मिलता है, जबकि अन्य जगह बच्चों की संख्या अलग बताई गई है। यही वजह है कि बाबा के परिवार से जुड़ी जानकारी लिखते समय प्रमाणित और स्पष्ट विवरणों को ही प्राथमिकता देना जरूरी है।
राम बेटी देवी के निधन को लेकर भी पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं
नीम करोली बाबा की पत्नी राम बेटी देवी के निधन को लेकर भी इंटरनेट पर सीमित जानकारी उपलब्ध है। कई जगह उनके निधन का वर्ष 2004 बताया जाता है, लेकिन उनकी मृत्यु की सटीक तारीख को लेकर स्पष्ट और सर्वमान्य जानकारी नहीं मिलती। इसलिए केवल उपलब्ध उल्लेख के आधार पर वर्ष 2004 को उनके निधन का बताया गया वर्ष माना जा सकता है।
यह भी एक कारण है कि राम बेटी देवी के जीवन की पूरी तस्वीर सामने लाना आसान नहीं है। बाबा के आध्यात्मिक जीवन पर जितना साहित्य उपलब्ध है, उतना उनकी पत्नी के निजी जीवन पर नहीं मिलता।
कैंची धाम की बढ़ती प्रसिद्धि के साथ परिवार भी चर्चा में आया
समय के साथ कैंची धाम नीम करोली बाबा की सबसे बड़ी पहचान बन गया। देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। बाबा के प्रति बढ़ती आस्था ने उनके जीवन के उन पहलुओं में भी लोगों की रुचि बढ़ाई, जिनके बारे में पहले बहुत कम चर्चा होती थी।
इसी वजह से अब लोग यह भी जानना चाहते हैं कि बाबा का विवाह किससे हुआ था, उनका परिवार कैसा था और आध्यात्मिक जीवन अपनाने के बाद उनके घर-परिवार पर क्या असर पड़ा। राम बेटी देवी की कहानी इसी जिज्ञासा का हिस्सा है।
बाबा की कहानी में पत्नी का अध्याय क्यों है खास?
नीम करोली बाबा का जीवन आम गृहस्थ व्यक्ति की तरह नहीं रहा। उन्होंने आध्यात्मिक रास्ता चुना और धीरे-धीरे उनकी पहचान एक बड़े संत के रूप में स्थापित होती गई। लेकिन इस सफर के साथ उनके परिवार का एक अलग संसार भी चलता रहा।
राम बेटी देवी इसी संसार का वह हिस्सा थीं, जो बाबा की प्रसिद्धि के बावजूद पर्दे के पीछे रहा। उन्होंने सार्वजनिक पहचान के बजाय परिवार को चुना और लंबे समय तक गुमनाम जीवन जिया। यही वजह है कि नीम करोली बाबा के जीवन को पूरी तरह समझने के लिए उनकी पत्नी और परिवार से जुड़े इस शांत अध्याय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

