Pakistan Shiv Temple: सावन का महीना शुरू होते ही भगवान शिव से जुड़े प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों की चर्चा तेज हो जाती है। इन्हीं में एक ऐसा ऐतिहासिक शिव मंदिर भी शामिल है, जो भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान में स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती के वियोग में भगवान शिव ने यहीं आकर विलाप किया था और उनके आंसुओं से एक पवित्र जलकुंड का निर्माण हुआ। यही कारण है कि हर सावन इस मंदिर का नाम श्रद्धालुओं के बीच फिर से चर्चा में आ जाता है।
कटसराज मंदिर क्यों है इतना खास?
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले में स्थित कटसराज मंदिर (Katas Raj Temples) हिंदू आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह मंदिर परिसर कई प्राचीन मंदिरों का समूह है, जिसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान सदियों पुरानी बताई जाती है। सावन के दौरान देश-विदेश के श्रद्धालु इस मंदिर के बारे में जानने और इसकी पौराणिक कथा को पढ़ने में खास रुचि दिखाते हैं।
माता सती के वियोग से जुड़ी है पौराणिक कथा (Pakistan Shiv Temple)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती ने आत्मदाह किया, तब भगवान शिव गहरे शोक में डूब गए। कहा जाता है कि इसी दुख में उनकी आंखों से गिरे आंसुओं से दो पवित्र जलकुंड बने। इनमें से एक कुंड पाकिस्तान के कटसराज मंदिर में स्थित है, जबकि दूसरा राजस्थान के पुष्कर क्षेत्र से जुड़ा माना जाता है।
दो रंगों वाला जलकुंड आज भी बना हुआ है आकर्षण का केंद्र
कटसराज मंदिर परिसर में मौजूद जलकुंड को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कुंड के उथले हिस्से का पानी हरे रंग का और गहरे हिस्से का पानी नीला दिखाई देता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह रंग गहराई, प्रकाश और पानी की संरचना के कारण भी दिखाई दे सकता है, लेकिन श्रद्धालु इसे दिव्य चमत्कार के रूप में देखते हैं।
महाभारत से भी जुड़ता है इस मंदिर का इतिहास
कुछ पौराणिक कथाओं में इस स्थान का संबंध महाभारत काल से भी बताया गया है। मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों की प्यास बुझाने से जुड़ी यक्ष-युधिष्ठिर कथा का संबंध भी इसी क्षेत्र के जलकुंड से जोड़ा जाता है। हालांकि इस संबंध के ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इसे धार्मिक परंपराओं का हिस्सा माना जाता है।
सावन में क्यों बढ़ जाती है इस मंदिर की चर्चा?
सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त शिव से जुड़े हर तीर्थ और पौराणिक स्थल के बारे में जानना चाहते हैं। कटसराज मंदिर भी उन्हीं स्थानों में शामिल है, जहां की कथा भगवान शिव के दुख, भक्ति और आस्था से जुड़ी होने के कारण विशेष महत्व रखती है।
क्या कहते हैं इतिहासकार?
इतिहासकारों के अनुसार, कटसराज मंदिर परिसर का निर्माण विभिन्न कालखंडों में हुआ और यह क्षेत्र लंबे समय तक हिंदू तथा बौद्ध संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। वहीं भगवान शिव के आंसुओं और माता सती से जुड़ी कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसे श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ मानते हैं।
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