
Bahuchar Mata Mandir: गुजरात शहर अपने ऐतिहासिक धरोहरों और अनोखी संस्कृति के वजह से पूरे विश्व में अलग पहचान बनाए हुए हैं। सूरत में कई मंदिर हुए जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है। यहां वेद रोड क्षेत्र में स्थित बहुचर माता जी का मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल है। इस मंदिर में केवल सूरत और गुजरात ही नहीं बल्कि अमेरिका लंदन से भी भक्त पूजा करने आते हैं। आपको बता दे पुराने समय में सूरत “84 बंदर का वावटो ” के नाम से जाना जाता था। यहां जहाज से सामान आया जाया करता था।
आयात किया गया माल शहर और आसपास के क्षेत्र में बेचने के लिए ‘पोथो’ नाम की व्यवस्था थी, जो मुख्य रूप से ऊंट पर की जाती थी. इस पोथ को वणझारों द्वारा चलाया जाता था। इन वणझारों में एक ‘बहुचर’ नाम का वणझार था, जो मां बहुचराजी का परम भक्त था।मंदिर के पुजारी बीनाबेन ठाकोर के अनुसार, इस वणझार को कोई संतान नहीं थी, इसलिए वह माताजी की भक्ति में लीन रहता था।
किसने बनवाया था मंदिर (Bahuchar Mata Mandir)
यहां के स्थानीय पुजारी ने कहा कि मंदिर की पूजा 100 सालों से हो रही है। जो भी यहां पूजा करता है उसे संतान की प्राप्ति होती है। बहुचर नाम के वणझार को संतान नहीं थी। वह यहां पर माता की भक्ति करता था जिसके बाद उसे बेटी हुई और जब बेटी 4 साल की हुई तो उसने अपने पिता को रंध्र क्षेत्र के बजाय वरियाव क्षेत्र की ओर पोथों यानि नाव ले जाने की सलाह दी। उसके मित्र ने दूसरे तरफ अपनी नाव को किया और चला गया और उधर उसके नाव को लूट लिया गया लेकिन वणझार बेटी के कहे दिशा में नाव ले गया और वहां उसकी काफी अच्छी कमाई हुई जिसके बाद बेटी ने बहुचर माता का मंदिर बनाने के लिए कहा।
इसके बाद वह नाविक काफी चिंता में पड़ गया। वाउचर को रात में स्वप्न में माताजी ने दर्शन दिया और कहा कि फणीधर नाग तुझे रास्ता दिखाएगा। उसके बाद नाविक को नाग का दर्शन हुआ और मंदिर बनाने की जगह के बारे में पता चला। जैसे ही मंदिर बना वणझार की बेटी की आत्मा माता की मूर्ति में समा गई और माता वही स्थिर हो गई।
बहुचरा देवी को किन्नर समाज की कुलदेवी के रूप में भी पूजा जाता है। किन्नर समाज के लोग बहुचरा माता को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजते हैं।
आज भी बड़े पैमाने पर लोग यहां मंदिर के लिए आते हैं। यहां लंदन अमेरिका सिंगापुर यूरोप से भक्त दर्शन करने आते हैं और धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन करने से बच्चे की प्राप्ति होती है।
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