Kunjapuri Temple: देवभूमि उत्तराखंड में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनके चमत्कार और रहस्य आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। नई टिहरी जिले के बटखेम गांव स्थित मां कालिंका मंदिर और ऋषिकेश के निकट प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां कुंजापुरी देवी मंदिर इन्हीं आस्था के केंद्रों में शामिल हैं। यहां एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान माता की डोली अपने आप झूमने और नृत्य करने लगती है। श्रद्धालु इसे मां भगवती की दिव्य उपस्थिति मानते हैं।
जब अचानक थिरकने लगती है माता की डोली
स्थानीय परंपरा के अनुसार, विशेष पूजा, जागर और धार्मिक अनुष्ठानों के समय माता की सजी हुई डोली को पश्वा और पुजारी अपने कंधों पर उठाते हैं। कुछ ही देर बाद डोली तेज गति से झूमने लगती है।
वहां मौजूद श्रद्धालुओं का कहना है कि इस दौरान डोली की गति सामान्य नहीं होती, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं मां शक्ति उसमें विराजमान होकर भक्तों को आशीर्वाद दे रही हों।
बटखेम गांव की पहचान बन चुका है यह चमत्कार (Kunjapuri Temple)

नई टिहरी जिले का बटखेम गांव आज केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि मां कालिंका मंदिर की इस अनोखी परंपरा के कारण भी प्रसिद्ध है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
नवरात्र, विशेष पूजा और स्थानीय धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। गांव के लोगों का विश्वास है कि माता की कृपा से पूरे क्षेत्र में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
कुंजापुरी देवी मंदिर में भी दिखता है अद्भुत नजारा
ऋषिकेश के पास स्थित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी देवी मंदिर में भी कई अवसरों पर माता की डोली के झूमने की मान्यता प्रचलित है।
धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। कई भक्तों का कहना है कि इस दिव्य क्षण को देखने के बाद उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
क्या है धार्मिक मान्यता?

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि डोली का नृत्य केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि मां शक्ति की जीवंत उपस्थिति का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दौरान माता अपने भक्तों की मनोकामनाएं सुनती हैं, उनके सिर पर आशीर्वाद देती हैं और जीवन के कष्टों को दूर करती हैं। इसी वजह से यहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय पर्यटन को भी मिल रहा बढ़ावा (Kunjapuri Temple)

उत्तराखंड के इन मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से आसपास के गांवों के पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिल रहा है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि त्योहारों और नवरात्र के समय होटल, होमस्टे, टैक्सी और छोटे व्यापारियों की अच्छी आय होती है। इससे क्षेत्र की धार्मिक पर्यटन गतिविधियों को नई पहचान मिली है।
माता की डोली के स्वयं नृत्य करने की मान्यता पूरी तरह धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। इस घटना की कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालु इसे देवी का चमत्कार मानते हैं, जबकि इसे आस्था के दृष्टिकोण से ही देखा जाता है।
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