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Saraswati Puja 2026: इन मंत्रों के बिना अधूरी मानी जाती है मां सरस्वती की पूजा, जानिए विद्या की देवी को प्रसन्न करने का सही तरीका

Saraswati Puja 2026
Saraswati Puja 2026

Saraswati Puja 2026: हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, संगीत और वाणी की देवी माना जाता है। खासतौर पर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि यदि पूजा के दौरान कुछ विशेष सरस्वती मंत्रों का जाप नहीं किया जाए, तो पूजा अधूरी रह जाती है और साधक को पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती।

क्यों जरूरी हैं सरस्वती माता के ये मंत्र? (Saraswati Puja 2026)

शास्त्रों के अनुसार मंत्र केवल शब्द नहीं होते, बल्कि वे दिव्य ऊर्जा के वाहक होते हैं। मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करने से मन एकाग्र होता है, स्मरण शक्ति तेज होती है और शिक्षा में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले और कलाकारों के लिए ये मंत्र विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं।

मां सरस्वती के प्रमुख और अनिवार्य मंत्र

1. सरस्वती बीज मंत्र
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”
यह मंत्र विद्या प्राप्ति का सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इसका नियमित जाप बुद्धि और विवेक को प्रखर करता है।

2. सरस्वती वंदना मंत्र
“या कुन्देन्दु तुषारहार धवला, या शुभ्रवस्त्रावृता…”
यह मंत्र मां सरस्वती के स्वरूप का वर्णन करता है और पूजा की शुरुआत में इसका पाठ शुभ माना जाता है।

3. विद्यार्थी विशेष मंत्र
“सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि”
यह मंत्र छात्रों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है और परीक्षा से पहले इसका जाप विशेष लाभ देता है।

पूजा में मंत्र जाप का सही समय और विधि

मां सरस्वती की पूजा प्रातः काल या शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। सफेद वस्त्र धारण करें, पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और मां को सफेद पुष्प, चावल और मिठाई अर्पित करें। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ उच्चारण करें। माना जाता है कि केवल दिखावे की पूजा से नहीं, बल्कि भाव और मंत्र शक्ति से देवी प्रसन्न होती हैं।

मान्यता और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ इन मंत्रों का जाप करता है, उसके जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर होता है। मां सरस्वती की कृपा से व्यक्ति को न केवल शिक्षा बल्कि जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता भी प्राप्त होती है। यही कारण है कि बिना मंत्र जाप के पूजा को अधूरा माना गया है।

Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है।

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