Vastu Tips: सनातन धर्म में वास्तु के नियमों का विशेष महत्व है। घर बनाते समय वास्तु के नियमों का पालन करना अति महत्वपूर्ण माना जाता है। घर खिड़की सीधी और तमाम चीजों के निर्माण में वास्तु के नियमों का महत्व देखने को मिलता है। आप अगर घर की सीढ़ी बना रहे हैं तो वस्तु के नियमों का जरूर ध्यान दें वरना आपकी परेशानी बढ़ सकती है।
सीढ़ियों के लिए कौन-सी दिशा है बेहतर?
वास्तु की मान्यताओं के अनुसार सीढ़ियों के निर्माण के लिए घर का दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम हिस्सा उपयुक्त माना जाता है। खासतौर पर दक्षिण-पश्चिम दिशा को भारी संरचनाओं के लिए अच्छा माना जाता है। इसलिए यदि मकान के नक्शे में पर्याप्त जगह हो तो सीढ़ियों को इन दिशाओं में रखने पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, हर घर का नक्शा अलग होता है। इसलिए केवल वास्तु के आधार पर जगह तय करने के बजाय सीढ़ियों की मजबूती, रोशनी, वेंटिलेशन और आने-जाने की सुविधा भी देखनी चाहिए।
ईशान कोण में सीढ़ियां बनाने से क्यों बचने की सलाह दी जाती है?
उत्तर-पूर्व दिशा को वास्तु शास्त्र में ईशान कोण कहा जाता है। पारंपरिक मान्यता में इस हिस्से को हल्का और खुला रखने की सलाह दी जाती है। इसी वजह से यहां भारी निर्माण करने से बचने की बात कही जाती है।
अगर पहले से बने मकान में इसी दिशा में सीढ़ियां हैं, तो सिर्फ वास्तु के नाम पर तुरंत तोड़फोड़ कराने की जरूरत नहीं है। किसी भी बदलाव से पहले पूरे भवन की संरचना और किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ या आर्किटेक्ट की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
सीढ़ियों का घुमाव किस तरफ होना चाहिए? (Vastu Tips)
वास्तु से जुड़ी कुछ परंपराओं में सीढ़ियों का घुमाव दक्षिणावर्त रखने की सलाह दी जाती है। आसान भाषा में कहें तो ऊपर जाते समय सीढ़ियों का मोड़ दाईं ओर की तरफ बढ़ता हुआ माना जाता है।
लेकिन सीढ़ियों का डिजाइन बनाते समय सिर्फ दिशा को प्राथमिकता देना सही नहीं है। सीढ़ियों की चौड़ाई, ऊंचाई, रेलिंग और फिसलने से बचाव जैसी व्यावहारिक चीजों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
सीढ़ियों के नीचे स्टोरेज बनवा रहे हैं तो रखें सफाई का ध्यान
जगह की कमी के कारण बहुत से लोग सीढ़ियों के नीचे अलमारी, स्टोर या कैबिनेट बनवा लेते हैं। वास्तु की मान्यताओं में इस स्थान को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। पुराने, टूटे हुए या बेकार सामान का ढेर लगाने से बचना बेहतर माना जाता है।
कुछ वास्तु परंपराओं में सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थल या मंदिर बनाने से भी परहेज करने की बात कही गई है। इसलिए इस जगह का इस्तेमाल तय करते समय घर की जरूरत और धार्मिक मान्यताओं दोनों को ध्यान में रखा जा सकता है।
सीढ़ियों की संख्या को लेकर क्या कहता है वास्तु?
सीढ़ियों की संख्या को लेकर वास्तु की अलग-अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं मिलती हैं। कुछ जगहों पर विषम संख्या में सीढ़ियां रखने की सलाह दी जाती है, जैसे 11, 13, 15 या 17।

