LPG crisis: होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय से बने तनाव ने दुनियाभर की ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर भारत के लिए LPG की उपलब्धता अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में भारत ने LPG की सप्लाई को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है।
अब भारत एक ही क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों से LPG मंगाने की तैयारी कर रहा है। इसी कड़ी में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) अफ्रीकी देश अल्जीरिया की सरकारी ऊर्जा कंपनी सोनात्रैक से LPG खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि यह कदम भारत को भविष्य में किसी एक रूट या क्षेत्र में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में राहत दे सकता है।
अल्जीरिया से हर महीने आ सकता है बड़ा LPG कार्गो
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अल्जीरिया के बीच LPG खरीद को लेकर समझौता होने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर महीने एक बड़ा गैस कैरियर भारत पहुंच सकता है। इसमें करीब 45 हजार से 55 हजार मीट्रिक टन LPG होने की बात सामने आई है।
इस हिसाब से सालभर में भारत को अल्जीरिया से लगभग 5.4 लाख से 6.6 लाख टन LPG मिल सकती है। हालांकि यह मात्रा देश की कुल जरूरत के मुकाबले छोटी है, लेकिन इससे भारत के पास एक अतिरिक्त और महत्वपूर्ण सप्लाई सोर्स जरूर तैयार होगा।
सबसे खास बात, कीमत में भी मिल सकती है राहत
अल्जीरिया से LPG खरीदने की योजना सिर्फ सप्लाई बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस डील में LPG की कीमत सऊदी अरामको के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस से कम रहने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो भारत को एक तरफ नया सप्लाई स्रोत मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ आयात लागत को संभालने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, समझौते की अंतिम कीमत और दूसरी व्यावसायिक शर्तों की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत पर इसके तत्काल असर का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
भारत को आखिर क्यों बदलनी पड़ रही है LPG खरीद की रणनीति?
भारत में LPG की खपत काफी ज्यादा है और घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। समस्या यह है कि भारत का LPG आयात लंबे समय से मध्य पूर्व के देशों पर काफी निर्भर रहा है। 2025 में भारत ने करीब 21.85 मिलियन टन LPG आयात की थी, जबकि कुल खपत लगभग 33.15 मिलियन टन रही।
इस आयात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी बेहद महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग पर किसी तरह की बाधा आने से भारत की LPG सप्लाई प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसी वजह से अब तेल कंपनियां सप्लाई के अलग-अलग रास्ते और नए अंतरराष्ट्रीय स्रोत तैयार करने पर जोर दे रही हैं।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता, अब कई देशों से LPG लेने की तैयारी (LPG crisis)
होर्मुज क्षेत्र में तनाव के दौरान LPG की उपलब्धता को लेकर भारत के सामने चुनौतियां आई थीं। इसके बाद यह जरूरत और स्पष्ट हो गई कि देश को LPG के लिए किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए।
अब सऊदी अरब, कतर, UAE और कुवैत जैसे पारंपरिक सप्लायरों के साथ-साथ भारत दूसरे देशों से भी कार्गो हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अल्जीरिया इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
अल्जीरिया भारत के लिए नया नाम नहीं है
भारत और अल्जीरिया के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से संबंध रहे हैं। इंडियन ऑयल का सोनात्रैक के साथ पहले भी LPG खरीद को लेकर टर्म डील का अनुभव रहा है। बाद में भारत की खरीद का फोकस मुख्य रूप से मध्य पूर्व की ओर बढ़ गया था।
हालिया परिस्थितियों के बाद भारत ने एक बार फिर अल्जीरिया की ओर रुख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 से अल्जीरिया से LPG आयात शुरू हुआ और अगस्त में करीब 1.10 लाख टन LPG मिलने की उम्मीद थी।
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