फिल्मों की चमक से दूर खेतों में बिताते थे वक्त, 27 एकड़ की जमीन पर खुद करते थे खेती, जानिए Nana Patekar से जुड़े अनसुने किस्से

Nana Patekar: नाना सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े होने वाली शख्सियत थे। किसानों के प्रति उनका लगाव किसी परिचय का मोहताज नहीं था। फिल्मों की दुनिया से अलग उनका एक ऐसा पक्ष भी था, जिसमें वे खेत, मिट्टी और ग्रामीण जीवन के बेहद करीब नजर आते थे।

Nana Patekar: बॉलीवुड में अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर का निधन हो गया है। 75 साल की उम्र में उनके जाने से फिल्म जगत के साथ-साथ वे लोग भी भावुक हैं, जिनके लिए नाना सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े होने वाली शख्सियत थे। किसानों के प्रति उनका लगाव किसी परिचय का मोहताज नहीं था। फिल्मों की दुनिया से अलग उनका एक ऐसा पक्ष भी था, जिसमें वे खेत, मिट्टी और ग्रामीण जीवन के बेहद करीब नजर आते थे।

मुंबई की चकाचौंध से अलग था जिंदगी का यह हिस्सा

नाना पाटेकर का जीवन हमेशा से अपेक्षाकृत सादगी भरा रहा। पुणे के आसपास मौजूद उनका फार्महाउस उनके इसी अंदाज की झलक देता था। करीब 27 एकड़ में फैली इस जमीन पर खेती होती थी और नाना यहां समय बिताना पसंद करते थे।

फार्महाउस को उन्होंने केवल आराम करने की जगह के तौर पर नहीं रखा था। जमीन के बड़े हिस्से में कृषि गतिविधियां होती थीं। यहां गेहूं, चना और धान जैसी फसलों की खेती किए जाने की जानकारी सामने आती रही है। खेती से जुड़ाव ने उन्हें ग्रामीण जीवन और किसानों की वास्तविक परेशानियों को करीब से समझने का मौका दिया।

फसल से मिलने वाली कमाई को लेकर भी था अलग नजरिया

नाना पाटेकर के बारे में सबसे खास बात यह रही कि खेती को उन्होंने केवल कमाई का जरिया नहीं माना। रिपोर्टों के अनुसार, खेत से मिलने वाली आमदनी का इस्तेमाल जरूरतमंद किसानों और ग्रामीण परिवारों की सहायता के लिए भी किया जाता था।

उनकी सोच का असर उनके आसपास काम करने वाले लोगों पर भी दिखाई देता था। खेती से होने वाली आय का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों तक पहुंचाने की पहल से जुड़ी कई बातें समय-समय पर सामने आती रही हैं। यही वजह थी कि किसानों के बीच उनकी छवि एक ऐसे व्यक्ति की बनी, जो उनकी परेशानी को सिर्फ दूर से नहीं देखता था।

किसानों की परेशानी पर खुलकर बोलते थे (Nana Patekar)

किसानों की आर्थिक मुश्किलें, फसल खराब होने का संकट और कर्ज जैसी समस्याएं नाना पाटेकर को भीतर तक प्रभावित करती थीं। वे कई मौकों पर किसानों की स्थिति पर खुलकर बात कर चुके थे।

उनके जीवन का एक चर्चित प्रसंग यह भी रहा कि उन्होंने अपनी निजी जरूरत को पीछे रखकर किसानों की सहायता को प्राथमिकता दी। एक बातचीत में उन्होंने बताया था कि एक महंगी कार खरीदने के लिए रकम जुटाने के बावजूद किसान परिवारों की परेशानियों की खबरों ने उनका मन बदल दिया था।

2015 में शुरू की ऐसी पहल, जिसका मकसद था जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना

किसानों के लिए उनका काम केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहा। 2015 में उन्होंने मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर एनएएएम फाउंडेशन की शुरुआत की। इस संस्था के माध्यम से महाराष्ट्र के जरूरतमंद किसानों और ग्रामीण परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम किया गया।

सूखे, पानी की कमी और आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को मदद देने के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में आर्थिक सहयोग जैसी गतिविधियां भी इस पहल से जुड़ी रहीं।

अभिनेता की पहचान से आगे किसानों के बीच बनी अलग जगह

नाना पाटेकर ने फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रही। खेती से उनका जुड़ाव और किसानों के लिए किए गए काम उनके व्यक्तित्व का ऐसा हिस्सा बन गए, जिसे उनके प्रशंसक लंबे समय तक याद रखेंगे।

एक अभिनेता के रूप में उनकी आवाज करोड़ों लोगों तक पहुंची, वहीं किसानों के मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें ग्रामीण समाज के एक अलग वर्ग से भी जोड़ा। उनके निधन के बाद उनके इसी पहलू की चर्चा एक बार फिर सामने आ रही है।

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