Cancer Disease: अगर आपको लगता है कि कैंसर सिर्फ बढ़ती उम्र की बीमारी है, तो अब यह सोच बदलने का समय आ गया है। पिछले कुछ वर्षों में डॉक्टरों के सामने ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनकी उम्र 30 से 40 साल के बीच है। सवाल यह है कि आखिर कम उम्र के लोग इस गंभीर बीमारी की चपेट में क्यों आ रहे हैं? हाल ही में सामने आई एक बड़ी वैज्ञानिक स्टडी ने इस सवाल का ऐसा जवाब दिया है, जिसने हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है।
रिसर्च के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी का शरीर बाहर से भले ही फिट दिखाई दे, लेकिन अंदर से वह पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से बूढ़ा हो रहा है। यही बदलाव कई गंभीर बीमारियों, खासकर कैंसर, के खतरे को बढ़ा सकता है।
उम्र वही, लेकिन शरीर पहले से ज्यादा थका हुआ क्यों?
वैज्ञानिकों का कहना है कि हर व्यक्ति की दो तरह की उम्र होती है। पहली वह जो जन्मतिथि से तय होती है और दूसरी वह, जो शरीर की असली स्थिति को बताती है। इसे जैविक उम्र कहा जाता है। कई बार 32 साल का व्यक्ति अंदर से 40 साल के शरीर जैसा हो सकता है, जबकि कुछ लोग 45 साल की उम्र में भी काफी स्वस्थ रहते हैं। यही अंतर अब वैज्ञानिकों के लिए शोध का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के डेटा ने बदल दी सोच
इस अध्ययन में लाखों लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और ब्लड सैंपल का विश्लेषण किया गया। अलग-अलग पीढ़ियों के आंकड़ों की तुलना करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि नई पीढ़ी में जैविक उम्र बढ़ने की गति पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है। यही वजह है कि पहले जिन बीमारियों को बुजुर्गों से जोड़कर देखा जाता था, वे अब युवाओं में भी दिखाई देने लगी हैं।
कैंसर का खतरा किन लोगों में सबसे ज्यादा देखा गया? (Cancer Disease)
रिसर्च के दौरान यह भी पता चला कि जिन लोगों का इम्यून सिस्टम अपनी वास्तविक उम्र से ज्यादा कमजोर या बूढ़ा दिखाई दिया, उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक था। वहीं जिन लोगों के शरीर में फैट टिश्यू तेजी से उम्रदराज हो रहे थे, उनमें कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम ज्यादा पाया गया। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को कैंसर होगा, लेकिन यह संकेत जरूर है कि शरीर की देखभाल पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है।
हमारी रोजमर्रा की आदतें बन रही हैं सबसे बड़ी दुश्मन
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी भी इस समस्या के पीछे एक बड़ा कारण है। देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप के सामने बैठे रहना, जंक फूड खाना, तनाव में रहना, व्यायाम से दूरी बनाना, धूम्रपान और बढ़ता मोटापा शरीर की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन समय के साथ शरीर समय से पहले बूढ़ा होने लगता है।
क्या समय रहते इस खतरे को कम किया जा सकता है?
अच्छी बात यह है कि विशेषज्ञ इसे पूरी तरह लाइलाज स्थिति नहीं मानते। उनका कहना है कि अगर कम उम्र से ही जीवनशैली में सुधार किया जाए तो जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, ताजा और संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण और नशे से दूरी शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।
युवाओं को इस रिपोर्ट से क्या सीख लेनी चाहिए?
डॉक्टरों का कहना है कि शरीर अक्सर बीमारी आने से पहले छोटे-छोटे संकेत देता है। लगातार थकान, बिना वजह वजन घटना, लंबे समय तक दर्द रहना या शरीर में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से कई गंभीर बीमारियों का इलाज शुरुआती चरण में ही संभव हो सकता है।
यह रिसर्च सिर्फ कैंसर के बढ़ते मामलों की ओर इशारा नहीं करती, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि अच्छी सेहत केवल उम्र पर नहीं, बल्कि हमारी रोज की आदतों पर भी निर्भर करती है। आज लिया गया सही फैसला भविष्य में बड़ी बीमारी से बचा सकता है।
यह लेख वैज्ञानिक अध्ययन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। यदि आपको किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या या लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
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