Spirituality : कैसे Spirituality से रख सकते हैं अपने स्वास्थ का खास ध्यान

Spirituality : Spirituality से आप आखिर समझते क्या हैं, क्या सिर्फ पूजा करना आध्यात्मिकता हैं या कुछ और आइए जानते हैं। Spirituality अपने आप में ही एक बहुत बड़ा शब्द हैं जिसका मतलब उसी में हैं। Spirituality का मतलब ही हैं “खुद से परे किसी चीज में भरोसे या विश्वास की धारणा हैं”। कोई इसे भगवान से जोड़ कर अपनाता हैं तो कोई अपनी अंतरआत्मा से जोड़ कर लेकिन जो भी अपनाता हैं वो पूरी तरह से अपने दिमाग,अपने शरीर को काबू करने के रास्ते पर चल देता हैं। Spirituality को अपनाने वाले को खुद में ही मजा आने लगता हैं जेबी उसे यूनिवर्स या मानव अस्तित्व से जुड़े कुछ सचों के बारे में पता चलता हैं।

Spirituality के प्रकार

Sprituallity के भी बहुत अलग प्रकार होते हैं। Sprituallity में लोग दो मेन रूप से बट जाते हैं मगर होते एक ही हैं। पहला हैं अपने खुद के तरीके से ख़ुद से जुड़ना और दूसरा अपने भगवान से जुड़ना Sprituallity में आता है। धार्मिक Sprituallity की बात करे तो इसमें आते हैं हिंदुइज्म,बुद्धिस्म, कीस्ट्रेनिटी, ह्यूमनिज्म, इस्लाम, ज्यूडिजम, सिखिस्म आदि। और बात करे ख़ुद से झुड़ कर Sprituallity अपनाने की तो उसमे आटा हैं मैडिटेशन, योगा, विज़ुअलाइज़ेशन, ब्रेथवर्क आदि अपने तरीके से लोग अपंव कम्फर्ट के हिसाब से इसे करना पसंद करते हैं।

Sprituallity
Spirituality

आध्यात्मिकता का स्वास्थ पर प्रभाव

इससे से ना केवल हमारे दिमाग में बल्कि हमारे शरीर पर भी एक बहुत सकारात्मक असर पड़ता हैं।  इसको फॉलो करने से हम खुद को स्वस्थ करने की और भी एक कदम बढ़ाते हैं। योग करना या मैडिटेशन करना आदि तरीको से हमारा स्वास्थ काफ़ी हद तक बीमारियों से बचा रहता हैं। पुराने समय के ऋषियों की बात करे तो उन्हें इतनी लंबी आयू का वरदान मिले होते थे और कही ना कही उसका कारण Spirituality ही होती हैं। इसका मतलब ये नहीं हैं कि आप सब कुछ त्याग कर ऋषि बन जाये और सभ शाम तप करे, बिलकुल नहीं इसका मतलब हैं कि आप अपना एक नियम तैयार करे जिसमें मैडिटेशन योग और प्रार्थन को विशेष रूप से जोड़े।

 

इसके और फायदे

स्वास्थ पर ध्यान देने के अलावा और बहुत सारी चीजे हैं जो यह आपको प्रदान करती हैं। बीमारी से दूर रहने के बाद भी शरीर या मनुष्य के दिमाग में बहुत सी चीज़ और होती हैं जिसने कारण उसे कही ना कही परेशानीयां होती हैं। ये मनुष्य को अपने इमोशंस को इतना क़ाबू करना सीखा देता हैं कि उसको इस बात का एहसास बहुत अच्छे से हो जाता हैं कि कब कौनसे इमोशन को क़ाबू करना हैं और कौसने इमोशन को फ्री करना हैं। इसकी शुरुआत होती हैं मन और दिमाग को क़ानू में करने से जो की सिर्फ मैडिटेशन या लंबे ध्यान की वजह से होता हैं। ये आपके स्ट्रेस को कंट्रोल करने में मदद करती हैं चाहे वो कितना ही कठिन समय क्यों ना हो। आपको Spirituality सकारात्मक रहना सिखाती हैं और भी बहुत कुछ ।

Spirituality कैसे फॉलो करे ?

ये फॉलो करने के कुछ बेसिक से तरीके हैं। सबसे पहला आता हैं कृतज्ञता । कृतज्ञता से मतलब हैं धन्यवाद देना उस परमेश्वर को यूनिवर्स को धन्यवाद देना। धन्यवाद उस हर एक चीज के लिए जो आपके पास हैं और सबसे बड़ी चीज हैं ये जीवन । इस जीवन के लिए परमात्मा को धन्यवाद देना , आप जी रहे हो उसके लिये धन्यवाद, आप खा रहे हो उसके लिये धन्यवाद, आपके पास घर हैं उसके किये धन्यवाद और सबसे बड़ी बाद आप अभी पढ़ पा रहे हो उसके लिए उस परमात्मा को धन्यवाद दें। उसके साथ साथ मैडिटेशन करना अपने ऊपर ध्यान देना ओए सबसे पहले खुद में कमियां निकालनी बंद करना Spirituality की शुरुआत होगी।

 

(यह खबर विधान न्यूज में इंटर्न कर रहीं कशिश नागर ने तैयार की है)

 

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