Unique Marriage Traditions: भारत की वो 4 जगहे जहाँ शादी के बाद दुल्हन नहीं, दूल्हा जाता है ससुराल! निभाई जाती है ये अनोखी परंपरा

Unique Marriage Traditions: मेघालय के कुछ मातृवंशीय समुदायों में परिवार और संपत्ति से जुड़ी व्यवस्था सामान्य पितृसत्तात्मक परंपरा से अलग है। खास तौर पर खासी और गारो समुदायों में वंश परंपरा मां की ओर से चलती है। परिवार में बेटियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और कुछ समुदायों में सबसे छोटी बेटी को पारिवारिक संपत्ति से जुड़ी जिम्मेदारी मिलती है।

Unique Marriage Traditions: भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। अलग-अलग राज्य में विवाह की अलग-अलग परंपरा देखा जाता है लेकिन एक परंपरा हर जगह देखने को मिलती है की शादी के बाद दूल्हे के घर दुल्हन जाती है। लेकिन आज हम आपको भारत के उन चार जगह के बारे में बताएंगे जहां दुल्हन नहीं बल्कि दूल्हे की विदाई की जाती ह।

मेघालय में बेटी के घर रहने की परंपरा

मेघालय के कुछ मातृवंशीय समुदायों में परिवार और संपत्ति से जुड़ी व्यवस्था सामान्य पितृसत्तात्मक परंपरा से अलग है। खास तौर पर खासी और गारो समुदायों में वंश परंपरा मां की ओर से चलती है। परिवार में बेटियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और कुछ समुदायों में सबसे छोटी बेटी को पारिवारिक संपत्ति से जुड़ी जिम्मेदारी मिलती है।

ऐसी सामाजिक व्यवस्था के कारण विवाह के बाद पति का पत्नी के परिवार के साथ रहना असामान्य नहीं माना जाता। इसे केवल ‘घर जमाई’ कहकर समझना इस व्यवस्था की पूरी तस्वीर नहीं बताता, क्योंकि इसके पीछे समुदाय की अपनी पारिवारिक परंपराएं हैं।

कानपुर के दमादनपुरवा में दूल्हे के रहने की चर्चा

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात क्षेत्र के दमादनपुरवा गांव का नाम भी घर जमाई की परंपरा से जोड़ा जाता है। यहां लंबे समय से ऐसी पारिवारिक व्यवस्था की चर्चा रही है, जिसमें बेटी की शादी के बाद दामाद को परिवार के साथ रहने के लिए जगह दी जाती है।

स्थानीय तौर पर इस परंपरा को गांव की पहचान से भी जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि कुछ परिवारों में बेटी को दूसरे घर भेजने के बजाय दामाद को अपने परिवार का हिस्सा बनाकर रखने की परंपरा रही है। हालांकि, यह व्यवस्था हर परिवार पर लागू हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

बागपत की जमाईपुरा बस्ती का नाम भी खास वजह से जुड़ा (Unique Marriage Traditions )

उत्तर प्रदेश के बागपत में जमाईपुरा नाम की बस्ती का जिक्र भी इसी तरह की पारिवारिक परंपरा के संदर्भ में किया जाता है। यहां दामादों के पत्नी के परिवार के साथ रहने की वजह से इस जगह के नाम को खास पहचान मिली।

ऐसी बस्तियों में कई परिवारों की सामाजिक व्यवस्था पारंपरिक विवाह व्यवस्था से थोड़ी अलग दिखाई देती है। यही कारण है कि इनके नाम और यहां की स्थानीय परंपराएं लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनती हैं।

मध्य प्रदेश के कुछ गांवों में भी रही है यह परंपरा

मध्य प्रदेश में भी कुछ इलाकों में शादी के बाद दामाद के पत्नी के घर रहने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। छिंदवाड़ा जिले के पंधराखेड़ी गांव के बारे में बताया जाता है कि यहां कुछ परिवारों में विवाह के बाद पति पत्नी के मायके में रहकर परिवार के काम में सहयोग करता है।

इसी तरह बुरहानपुर जिले के निमोला गांव का नाम भी इस परंपरा से जोड़ा जाता है। स्थानीय विवरणों में यहां कई पीढ़ियों से दामाद के पत्नी के परिवार के साथ रहने की बात कही जाती है। समय के साथ इन परंपराओं में बदलाव भी आया है और सभी परिवारों में एक जैसी व्यवस्था हो, यह जरूरी नहीं है।

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