Supreme Court: NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन छात्रों या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच कराने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने कानून नहीं तोड़ा है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, तो उसे अनावश्यक रूप से हिरासत में रखना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित है और इस अधिकार के प्रयोग के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सात राज्यों से मांगा जवाब (Supreme Court)
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य, विशेषकर CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड, सुरक्षित रखे जाएं ताकि जांच के दौरान किसी भी तरह के सबूत नष्ट न हों।
स्वतंत्र और पारदर्शी जांच पर जोर
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि पुलिस या किसी अन्य पक्ष द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। अदालत के अनुसार पूरे मामले की जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।
बल प्रयोग के आरोपों पर भी हुई चर्चा
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों और अन्य लोगों के साथ कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। सुनवाई में ऐसे आरोपों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें गंभीर चोटें आने, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और मीडिया कर्मियों पर हमले जैसी घटनाएं शामिल थीं। अदालत ने कहा कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और किसी भी दोषी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
सरकार ने भी रखा अपना पक्ष
केंद्र की ओर से पेश पक्ष में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सरकार ने अदालत को बताया कि कुछ असामाजिक तत्वों की मौजूदगी की भी जानकारी मिली है, इसलिए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।
मौलिक अधिकारों का भी उठा मुद्दा
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों के तर्क और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की सुनवाई में उचित निर्णय लिया जाएगा, जबकि फिलहाल निष्पक्ष जांच और निर्दोष लोगों की रिहाई सर्वोच्च प्राथमिकता है।

