50/30/20 Budget Rule: 30 दिन की सैलरी 10 दिन में खत्म? 50/30/20 फॉर्मूले से ऐसे संभालें हर महीने का बजट

50/30/20 Budget Rule: 30 दिन की सैलरी 10 दिन में खत्म हो जाती है? जानिए 50/30/20 Budget Rule क्या है और जरूरत, शौक व बचत के बीच हर महीने पैसे को कैसे मैनेज करें।

50/30/20 Budget Rule: कई बार आपने नोटिस किया होगा महीने की पहली तारीख को सैलरी आई है और कुछ महीने में ही पूरी सैलरी खत्म हो जाती है। ऐसे में पूरे महीने तक सरवाइव करना काफी मुश्किल लगता है लेकिन कुछ ऐसे टिप्स है जिसे आजमा कर आप आसानी से अपनी सैलरी को बचा सकते हैं।

ऐसी स्थिति में 50/30/20 बजट रूल आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। यह बहुत ही अच्छा फाइनेंशियल टिप्स है जिसे अपना कर कई लोग पूरे महीने तक अपनी सैलरी को बचाते हैं और पूरे महीने घर के जिम्मेदारियां को उठाने के साथ-साथ अपने भविष्य के लिए भी पैसे जमा कर पाते हैं।

क्या है 50/30/20 बजट रूल?

50/30/20 नियम के मुताबिक टैक्स और दूसरी कटौतियों के बाद आपके हाथ में आने वाली सैलरी को तीन हिस्सों में बांटने का सुझाव दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि जरूरी खर्च पूरे होने के साथ-साथ बचत और निवेश के लिए भी पैसा अलग रखा जा सके।

इस रुल के अनुसार 50% सैलरी आप अपने जरूरत के लिए रख सकते हैं वही 30% सैलरी आप अपने इच्छाओं को पूरी करने के लिए रख सकते हैं साथ ही साथ 20% सैलरी आप अपने भविष्य के लिए बचा सकते हैं जिससे आपका घर भी अच्छे से चलेगा और आपके भविष्य में भी कोई परेशानी नहीं होगी।

सैलरी का 50% जरूरी खर्चों के लिए

सैलरी का लगभग आधा हिस्सा उन खर्चों पर जाना चाहिए, जिन्हें टाला नहीं जा सकता। इसमें घर का किराया, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की पढ़ाई, इंश्योरेंस और इसी तरह के दूसरे जरूरी खर्च शामिल हो सकते हैं।

अगर इन खर्चों का हिस्सा लगातार 50 फीसदी से काफी ऊपर जा रहा है तो आपको अपने बाकी खर्चों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। खासकर गैर-जरूरी खर्चों को कम करके बजट को संतुलित किया जा सकता है।

30% पैसा अपनी इच्छाओं पर खर्च करें (50/30/20 Budget Rule)

बजट बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी पसंद की चीजों पर पैसा खर्च करना पूरी तरह बंद कर दें। 50/30/20 नियम में करीब 30 फीसदी रकम उन खर्चों के लिए रखी जाती है, जो जरूरी तो नहीं हैं लेकिन आपकी लाइफस्टाइल और खुशी से जुड़े हैं।

इसमें बाहर खाना, फिल्म देखना, शॉपिंग, ओटीटी सब्सक्रिप्शन, घूमना-फिरना या दूसरी पसंद की चीजें शामिल हो सकती हैं। हालांकि, अगर महीने की शुरुआत में ही ज्यादा खर्च हो जाता है तो इसी हिस्से को सबसे पहले नियंत्रित किया जा सकता है।

20% रकम बचत और निवेश के लिए रखें

इस फॉर्मूले का सबसे अहम हिस्सा आपकी बचत है। कोशिश करें कि सैलरी आने के बाद करीब 20 फीसदी रकम को पहले ही अलग कर दिया जाए। इसे इमरजेंसी फंड बनाने, पीपीएफ, एफडी या अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के मुताबिक उपयुक्त निवेश विकल्पों में लगाया जा सकता है।

अगर आपके ऊपर पुराना कर्ज है तो वित्तीय स्थिति के अनुसार उसके भुगतान को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। निवेश का चुनाव करने से पहले उसके जोखिम, रिटर्न और अपनी जरूरतों को समझना चाहिए।

मंथली बजट बनाने के लिए अपनाएं ये 3 स्टेप

1. सबसे पहले इन-हैंड सैलरी देखें: महीने में वास्तव में आपके खाते में कितनी रकम आती है, उसी को आधार बनाकर बजट तैयार करें।

2. जरूरी खर्चों की लिस्ट बनाएं: किराया, राशन, बिल, फीस, ईएमआई और दूसरे अनिवार्य खर्चों को अलग-अलग लिखें। इससे पता चलेगा कि आपकी आय का कितना हिस्सा पहले ही तय खर्चों में चला जाता है।

3. सैलरी आते ही बचत अलग करें: महीने के अंत में जो पैसा बचेगा, उसे बचाने की बजाय शुरुआत में ही बचत की रकम अलग करना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। इसके बाद बची रकम से महीने का बाकी खर्च प्लान करें।

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