Dhirendra Mulkalwar: फिल्म इंडस्ट्री में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। कई कलाकार और टेक्नीशियन सालों तक मेहनत करने के बावजूद उस एक मौके का इंतजार करते रहते हैं, जो उनकी पूरी जिंदगी बदल दे। संगीतकार धीरेन्द्र मुलकलवार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। करीब दो दशक तक संघर्ष और रिजेक्शन झेलने के बाद उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश’ से ऐसा मौका मिला, जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी।
फिल्म की सफलता के साथ धीरेन्द्र की पहचान भी तेजी से बढ़ी है। जिस इंडस्ट्री में कभी नए होने की वजह से उन्हें प्रोजेक्ट्स से बाहर कर दिया जाता था, वहीं अब उनके पास काम के ऑफर्स आने लगे हैं।
छोटी शुरुआत से बड़े पर्दे तक पहुंचने का सपना
महाराष्ट्र के चंद्रपुर से आने वाले धीरेन्द्र ऐसे माहौल में बड़े हुए, जहां जंगलों और आदिवासी लोक संगीत का प्रभाव था। बचपन से ही संगीत से जुड़ाव रहा और सपना था कि एक दिन बड़े पर्दे पर बतौर म्यूजिक कंपोजर काम करेंगे।
मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने विज्ञापन फिल्मों और जिंगल्स के लिए संगीत तैयार किया। लेकिन फिल्मों में अपनी जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं रहा। कई प्रोजेक्ट बंद हो गए तो कुछ जगहों पर उन्हें सिर्फ इसलिए रिप्लेस कर दिया गया क्योंकि वह इंडस्ट्री में नए थे।
यह सिलसिला इतना लंबा चला कि करीब 20 साल के संघर्ष के बाद उन्होंने मुंबई छोड़कर वापस घर लौटने तक का मन बना लिया था।
कैंची धाम जाने के बाद आया जिंदगी में नया मोड़ (Dhirendra Mulkalwar)
धीरेन्द्र पिछले करीब चार साल से कैंची धाम जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से उनका जाना टल जाता था। आखिरकार वह कैंची धाम पहुंचे।
इसके करीब दो महीने बाद निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने उन्हें ‘हनुमान अंश’ में संगीत देने का मौका दिया। धीरेन्द्र इस घटनाक्रम को सिर्फ संयोग नहीं मानते। उनके मुताबिक, उन्हें लगता है कि नीम करोली बाबा की कृपा से उन्हें उनकी मेहनत का फल मिला।
फिल्म के संगीत पर भी रहा खास अनुभव
‘हनुमान अंश’ के संगीत पर काम करना भी उनके लिए आसान नहीं था। फिल्म के पहले थीम को तैयार करने में करीब दो महीने लग गए। काफी कोशिशों के बाद भी जब धुन नहीं बन पाई तो उन्होंने बाबा जी का ध्यान किया।
इसके बाद कुछ ही मिनटों में उनके दिमाग में एक धुन आई। धीरेन्द्र के मुताबिक, फिल्म के संगीत पर काम करते हुए ऐसी परिस्थितियां कई बार बनीं, जब कोई चीज अटकने के बाद अचानक उसका समाधान मिल गया।
उन्होंने अपने दोस्तों को भी तैयार संगीत सुनाया और उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक रही। दोस्तों ने इसे ‘डिवाइन’ बताया।
शूटिंग के दौरान भी अपनाया खास माहौल
फिल्म की शूटिंग के दौरान टीम ने भी एक खास अनुशासन का पालन किया। धीरेन्द्र के अनुसार, हर दिन पहला शॉट शुरू करने से पहले पूरी टीम करीब 30 से 40 मिनट तक हनुमान चालीसा का पाठ और आरती करती थी।
उनके मुताबिक, प्रार्थना के बाद कई बार शूटिंग से जुड़ी परेशानियां अपने आप सुलझती नजर आती थीं। टीम ने शूटिंग के दौरान सात्विक भोजन और जीवनशैली को भी अपनाया था।
2 करोड़ की फिल्म ने कमाए 250 करोड़ से ज्यादा
‘हनुमान अंश’ का बजट करीब 2 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 250 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। फिल्म की इस सफलता ने इससे जुड़े कई लोगों को पहचान दिलाई है और धीरेन्द्र भी उनमें शामिल हैं।
धीरेन्द्र का मानना है कि फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने में सोशल मीडिया की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रही।
कभी रिजेक्शन, अब लगातार आ रहे ऑफर्स
सबसे बड़ा बदलाव धीरेन्द्र के करियर में देखने को मिल रहा है। जिन लोगों की तरफ से उन्हें पहले रिजेक्शन मिला था, अब उन्हीं में से कुछ लोग उन्हें खुद फोन करके काम की पेशकश कर रहे हैं।
करीब 20 साल के संघर्ष के बाद मिली यह सफलता उनके लिए सिर्फ एक फिल्म की कामयाबी नहीं है, बल्कि उस लंबे सफर का नतीजा है जिसमें उन्होंने कई बार हार मानने के बारे में सोचा, लेकिन संगीत से अपना रिश्ता नहीं छोड़ा।
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