KGF Star Yash Story: न कोई गॉडफादर, न करोड़ों की दौलत… 300 रुपये लेकर निकले यश ऐसे बने KGF के रॉकी भाई

KGF Star Yash Story: KGF स्टार यश कभी सिर्फ 300 रुपये लेकर घर से बेंगलुरु पहुंचे थे। थिएटर में 50 रुपये रोज की नौकरी से शुरू हुआ सफर कैसे बना सुपरस्टार बनने की कहानी, जानिए पूरी दास्तान।

KGF Star Yash Story: आज जिस अभिनेता की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और करोड़ों की फैन फॉलोइंग की चर्चा होती है, कभी वही कलाकार सिर्फ 300 रुपये लेकर अपना सपना पूरा करने के लिए घर से निकल पड़ा था। थिएटर में छोटे-मोटे काम करने से लेकर साउथ सिनेमा के बड़े सितारे बनने तक यश ने लंबा संघर्ष किया है। आइए जानते हैं उनके शून्य से शिखर तक पहुंचने की कहानी।

300 रुपये लेकर घर से निकले थे यश, फिर ऐसे बदली पूरी जिंदगी

कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता यश को आज पूरी दुनिया रॉकी भाई के नाम से भी पहचानती है। K.G.F. फ्रेंचाइजी ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था। अभिनय को करियर बनाने का फैसला जब परिवार को पसंद नहीं आया, तब यश ने अपने सपने को पूरा करने के लिए घर छोड़ने का बड़ा फैसला लिया।

बस ड्राइवर के बेटे ने देखा था अभिनेता बनने का सपना

यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक में हुआ था। उनके पिता अरुण कुमार बस ड्राइवर रहे हैं, जबकि उनकी मां पुष्पा गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने वाले यश की शुरुआत भी किसी फिल्मी परिवार के स्टार किड की तरह नहीं हुई थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपना रास्ता बनाने का फैसला किया।

अभिनेता बनने के लिए 300 रुपये लेकर पहुंचे बेंगलुरु (KGF Star Yash Story) 

यश ने अपने संघर्ष के बारे में एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वह कम उम्र में ही घर से निकलकर बेंगलुरु पहुंच गए थे। उस समय उनकी जेब में सिर्फ 300 रुपये थे। उनके सामने कोई बड़ा फिल्मी बैकग्राउंड या तैयार करियर नहीं था। उन्हें सिर्फ अपने हुनर और सपने पर भरोसा था।

पहली कोशिश में ही लगा बड़ा झटका, फिल्म का काम हुआ बंद

बेंगलुरु पहुंचने के बाद यश ने फिल्म निर्माण से जुड़े काम को समझने की कोशिश की। उन्होंने एक फिल्ममेकर के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम शुरू किया, लेकिन प्रोजेक्ट ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका। यह शुरुआत उनके लिए निराशाजनक जरूर थी, मगर उन्होंने हार नहीं मानी।

50 रुपये रोज कमाकर थिएटर में सीखा एक्टिंग का असली हुनर

इसके बाद यश थिएटर से जुड़ गए। यहां उनकी शुरुआत किसी बड़े अभिनेता की तरह नहीं, बल्कि बैकस्टेज वर्कर के तौर पर हुई। उन्हें रोजाना करीब 50 रुपये मिलते थे। मंच के पीछे चाय पहुंचाने से लेकर प्रोडक्शन से जुड़े दूसरे छोटे-बड़े काम करने तक, उन्होंने हर जिम्मेदारी निभाई।

यही दौर उनके लिए एक्टिंग की असली पाठशाला साबित हुआ। थिएटर के माहौल में रहते हुए उन्होंने मंच पर अभिनय करने के मौके तलाशे और धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा लोगों की नजर में आने लगी।

थिएटर के मंच से मिली पहचान, फिर फिल्मों का खुला रास्ता

यश ने थिएटर में काम करते हुए अभिनय की बारीकियां सीखीं। मंच पर उनकी पहली प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा और उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया। धीरे-धीरे उन्होंने कन्नड़ मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।

2007 में फिल्मों में रखा कदम, लगातार आगे बढ़ते गए

यश ने 2007 में फिल्म ‘जंबाडा हुडुगी’ से फिल्मी दुनिया में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्हें सपोर्टिंग भूमिकाएं मिलीं, लेकिन उन्होंने हर किरदार में अपनी छाप छोड़ने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला और उनका करियर धीरे-धीरे मजबूत होता गया।

‘KGF’ ने बदल दी किस्मत, देशभर में बन गए रॉकी भाई

यश के करियर में सबसे बड़ा मोड़ ‘K.G.F: Chapter 1’ से आया। फिल्म की जबरदस्त सफलता ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा से निकालकर पूरे देश के दर्शकों तक पहुंचा दिया। इसके बाद ‘K.G.F: Chapter 2’ ने उनकी लोकप्रियता को और बड़ा कर दिया। रॉकी भाई के किरदार में यश को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

संघर्ष से मिली सफलता की कहानी आज भी करती है प्रेरित

यश की कहानी सिर्फ एक फिल्म स्टार के सफल होने की कहानी नहीं है। यह उस जुनून की मिसाल है जिसमें इंसान मुश्किल हालात के बावजूद अपने लक्ष्य को छोड़ने से इनकार कर देता है। कभी 300 रुपये लेकर घर से निकलने वाला यह लड़का आज भारतीय सिनेमा के चर्चित सितारों में शामिल है। उनके सफर की सबसे बड़ी सीख यही है कि शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सपने बड़े रखने से डरना नहीं चाहिए।

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